दलित और पिछड़े के राग़ में मोदी और ने गंवाया बीजेपी का अपना वोट बैंक, अब भुक्तेंगे खामियाजा: सुधा भारद्वाज Featured

01 Jun 2018
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आवाज़(रेखा राव, दिल्ली): जैसे ही कल उपचुनाव के नतीज़े आये सियासी गलिआरों में इस बात को लेकर चर्चा तेज़ हुई की मोदी को हराना है तो विपक्ष को एक होना होगा.यानी जो चीज़ अबतक असम्भव दिख रही थी अब वही संभव दिख रही है बस विपक्ष को अपने मतभेद भुलाकर एक होना होगा. जिसके लिए प्रयास भी शुरू हो चुके हैं. उत्तर प्रदेश से शुरू हुआ ये महागठबंधन अब कर्नाटक तक पहुँच गया है और ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि 2019 से पहले-पहले पूरे देश में मोदी के खिलाफ विपक्ष की लाम्बंदी होगी. बीजेपी के लिए महज़ विपक्ष की लामबंदी ही चिंता का विषय नन्हीं है बल्कि दिनोंदिन पार्टी के अपने वोट बैंक और खिसकता जनाधार भी चिंता का विषय है. ऐसे में बीजेपी से जुड़े कुछ वरिष्ठ लोग और नेता भी इस बात पर चिंता जताने लगे हैं कि आखिर क्यों बीजेपी दिनोंदिन अपने वोट-बैंक को खोटी जा रही है.

ऐसा ही कुछ देखने को मिला जब कल उपचुनाव के नतीजे आये. बीजेपी की हार पर नजर डालें तो या तो पार्टी का वोट-बैंक या तो घर से बाहर वोट डालने के लिए निकला ही नहीं या फिर उन्होंने बीजेपी को उस तादाद में वोट नहीं किया जितना की पहले होता था. पार्टी के इसी खिसकते जनाधार को लेकर बीजेपी से जुड़ी सामाजसेविका एवं माँ कालका धर्मार्थ ट्रस्ट की अध्यक्षा सुधा भारद्वाज ने भी चिंता जताई है. सुधा का कहना है कि पार्टी की इस हार की सबसे बड़ी वजह मोदी का दलित और पिछड़े वोट बैंक के प्रति प्रेम है. मोदी इसी वोट-बैंक को पाने के चक्कर में अपने वोट-बैंक को खोते जा रहे हैं जिसका खामियाज़ा पार्टी को भुगतना पड़  रहा है.

सुधा की मानें तो अगर बीजेपी नहीं सुधरी तो ये तो बस शुरुआत है इसका असली असर तो 2019 में देखने को मिलेगा जब बीजेपी के पुराने लोग भी उसे वोट नहीं देंगे. सुधा ने मोदी को सलाह दी कि मोदी को ये समझना होगा दलित और पिछड़े वोट-बैंक कभी भी बीजेपी के पक्ष में नहीं रहे. आप आंकड़े उठा कर देख लीजिये. और अब कितना दलित और पिछड़े का वोट आपको मिल रहा है वो भी आपके सामने है. आप अपने वोट-बैंक को खोते जा रहे हो. वहीँ राम मंदिर के मसले पर भी उन्होंने बीजेपी को नसीहत दी और उसपर राम मंदिर के बनाने से मुकरने का इलज़ाम लगाया. उन्होंने कहा कि बीजेपी ने राम मंदिर के मुद्दे पर आम-जन को ही नहीं बल्कि पूरे देश के साधू-संत समाज को भी ठगा है. अगर हल कोर्ट के द्वारा ही निकलना था तो क्योंकि सैंकड़ों हिन्दुओं की जानें गवाईं. आपने जन-भावनाओं को अपने राजनीतिक हित के पीछे कुर्वान कर दिया, और अब जब केंद्र में आपकी पूरी बहुमत वाली सरकार है तो आप कहते हैं की मामला कोर्ट में है.

सुधा यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने आगे कहा कि  हमारी पार्टी को संतों का आशीर्वाद था. इसके अलावा प्रवीण तोगड़िया जैसे दिग्गज़ हमारे साथ थे. बीजेपी कभी बीजेपी ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य की पार्टी हुआ करती थी. हम सब लोगों ने मिलकर इसे अपने खून-पसीने से सींचा है और यहाँ तक पहुँचाया है. लेकिन अब जो बीजेपी आप देख रहे हैं इसमें हमारी कोई जगह नहीं है. पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेता आडवाणी, मुरली मनोहर, जोशी, शांता कुमार, गोविन्दाचार्य, यशवंत सिन्हा आज कहाँ हैं. आज तो बस सब कुछ रिमोट से चल रहा है. बीजेपी अब प्राइवेट लिमिटेड पार्टी हो गई है जिस[पर बस दो लोगों का अधिकार है. वही सब कुछ करते हैं. लेकिन अब कार्यकर्ता सब समझ गया है. झूठ और काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती. अगर बीजेपी अभी नहीं चेती तो 2019 में उसे इस बात का खमियाज़ा भुगतना पड़ेगा. अभी भी वक़्त है पार्टी के कार्यकर्ता को सम्मान दो. उसकी बात सुनो, उसके ऊपर अपनी बात मत थोपो... सुधा ने चेतावनी भरे अंदाज़ में कहा कि अभी नहीं चेते तो फिर वही कहना पड़ेगा कि अब पछताए क्या होत जब चिड़िया चुग गई खेत......

 

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