बीजेपी मास्टर प्लान 2019: दलितों, आदिवासियों के साथ दक्षिण भारत और पूर्वोतर पर रहेगी ख़ास नजर....... Featured

25 Apr 2018
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आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): बीजेपी ने आगामी लोकसभा चुनाव का शंखनाद अभी कर दिया है. पार्टी अध्यक्ष अमित शाह एक सधी हुई रणनीति के तहत फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं. अभी हालिया वाक्यों पर नजर डालें तो बीजेपी ने अपनी रणनीति पूरी तरह से बदली है जिसे आगामी लोकसभा चुनावों से जोड़कर देखा जा रहा है. जो पार्टी ब्राह्मण, बनिया, और राजपूतों की पार्टी के रूप में जानी जाती थी आज वो दलितों की सबसे बड़ी हितैषी होने का दावा कर रही है. जिस से ये साफ़ हो जाता है कि बीजेपी की इस वोट बैंक पर ख़ास नजर है. राजनितिक पंडितों की मानें तो पार्टी के अंदर ये बदलाव रातों-रात नहीं आया है बल्कि इसके लिए पार्टी के अंदर काफी मंथन हुआ है जिसके बाद भाजपा ने इस रणनीति को अमलीजामा पहनाने की कवायद शुरू की है. 

जानकारों की मानें तो पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने बीजेपी को और मजबूत करने के लिए दलितों और आदिवासियों को पार्टी के साथ जोड़ने के लिए एक विशेष योजना बनाई है. जिसके तहत पूरे देश के दलितों और आदिवासियों को ये विश्वास दिलाने की कोशिश की जा रही है कि बीजेपी ही उनकी सच्ची हितैषी है. बीजेपी ये बात भली भाँती जानती है कि ये वोट बैंक आमतौर पर कभी भी बीजेपी के साथ नहीं रहा है और अगर इस वोट बैंक में वो सेंध लगाने में कामयाब हो गये तो उन्हें सत्ता में वापसी से कोई नहीं रोक सकता. राजनितिक पंडितों के मुताबिक इसका सीधा असर पंजाब, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र सहित कई ऐसे प्रदेशों में देखने को मिलेगा जहाँ दलितों की तादाद ज्यादा है. सूत्रों की मानें तो पार्टी इसी रणनीति के तहत जल्द ही उत्तर प्रदेश में भी योगी मंत्रिमंडल में फेरबदल कर सकती है और दलित चेहरों को इसमें शामिल किया जा सकता है जिससे इस समुदाय के अंदर बीजेपी के लिए उनका हितैषी होने की भावना पैदा हो. क्योंकि योगी सरकार से कुछ दलित सांसद अपनी नाखुशी जता चुके हैं और प्रधानमंत्री से भी योगी की कार्यप्रणाली पर नाराज़गी जता चुके हैं. इसके बाद ये सम्भावना जताई जा रही है कि योगी मंत्रिमंडल में एक या दो और बड़े दलित चेहरे शामिल हो सकते हैं जो आगामी लोकसभा चुनाव में दलितों को बीजेपी के साथ जोड़ने का काम करेंगे. इसी कड़ी में दलितों और आदिवासियों तथा ग्रामीण महिलाओं को जोड़ने के लिये  "ग्राम स्वराज" अभियान शुरू किया गया है. गौरतलब है कि "ग्राम स्वराज" अभियान के दौरान 21,058 गांवों के लिए विशेष पहल शुरू की गई है जहां दलितों की अच्छी खासी आबादी. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पार्टी सांसदों, विधायकों एवं नेताओं से इन गांवों में दो दो रातें गुजारने को कहा है.

साथ ही 2019 लोकसभा चुनाव के लिये बीजेपी उन 90 सीटों को जीतने पर भी जोर दे रही है, जहां पिछले चुनाव में वह दूसरे स्थान पर रही थी. यानी जहाँ बीजेपी थोड़ी और मेहनत करे तो बाज़ी उनके हाथ लग सकती है. पार्टी ने इसके लिए वाकायदा डेढ़ दर्जन केंद्रीय मंत्रियों एवं वरिष्ठ नेताओं को पांच-पांच सीटों का ‘पालक’ बनाकर इसकी जिम्मेवारी सौंपी है. इन नेताओं में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, जे पी नड्डा, धर्मेंद्र प्रधान, प्रकाश जावड़ेकर, मनोज सिन्हा, नरेंद्र सिंह तोमर, पी पी चौधरी, गजेन्द्र सिंह शेखावत आदि शामिल हैं. इसके लिये ऐसे मंत्रियों का चुनाव किया गया है जिनके पास सांगठनिक अनुभव भी है. जाहिर तौर पर ये पालक केंद्रीय योजनाओं के जरिए भी जमीन तक पहुंचने की कोशिश करेंगे और संगठनकर्ता के रूप में भी पार्टी को मजबूत बनायेंगे. काफी संख्या में सीटों के लिये प्रभारी तैनात किये जा चुके हैं.  यानी भाजपा अब वर्ष 2014 में जीती 283 सीटों के अलावा उन 90 सीटों पर जोर दे रही है, जिन पर वह 2014 में दूसरे स्थान पर रही थी. इसके अलावा पार्टी का ध्यान उन 142 सीटों पर भी है जिन पर भाजपा को कभी जीत हासिल नहीं हुई. ये सीटें पश्चिम बंगाल, ओडिशा, केरल, तमिलनाडु, पूर्वोत्तर, आंध्रप्रदेश जैसे राज्यों में हैं. पिछले कुछ समय में जैसे पश्चिम बंगाल, केरल, ओडिशा, और पूर्वोत्तर भारत में काफी मजबूत हुई है जिससे पार्टी को ये उम्मीद है कि इस बार बीजेपी वो सीटें भी जीतेगी जो अपने इतिहास में वो कभी नहीं जीत पाई.

इसी रणनीति के तहत भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने इसी महीने से अलग-अलग प्रदेशों की 5-5 लोकसभा सीटों के लिए अपने दौरे शुरू किये हैं. गौरतलब है कि अप्रैल के पहले हफ्ते में शाह ने उड़ीसा के दो दिन के दौरे में 5 लोकसभा सीटों को कवर किया. इन दौरों में शाह ने खास तौर पर पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करने, बूथ प्रमुखों का सम्मेलन करने और रोड शो के जरिए आम लोगों से संपर्क कायम करने पर ध्यान केंद्रित किया. इसी कड़ी में शाह ने 21 अप्रैल को उत्तरप्रदेश का दौरा किया. इस दौरे में उन्होंने रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़ सीटों के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की. साथ ही पार्टी कार्यकर्ताओं के एक सम्मेलन को भी उन्होंने सम्बोधित किया. जबकि शाह मई के दूसरे हफ्ते में राजस्थान का दौरा करेंगे जहां हाल ही में पार्टी को लोकसभा की दो सीटों पर हुए उपचुनाव में हार का सामना करना पड़ा था.

युवा वोटरों पर भी ख़ास नज़र ....

साथ ही भाजपा की इस योजना में वे दो करोड़ मतदाता भी शामिल हैं जो साल 2000 में पैदा हुए हैं और 2019 में पहली बार वोट डालेंगे. युवा मतदाताओं की बड़ी संख्या को देखते हुए भाजपा ने मिशन 2019 के तहत युवाओं पर खासा जोर दिया है. इसके तहत ‘हर बूथ-दस यूथ’ का फार्मूला पूरे देश में लागू किया जा रहा है. ऐसे युवाओं को पार्टी की तरफ आकर्षित करने के लिए पार्टी के ख़ास योजना बनाई है जिसके तहत बीजेपी का युवा मोर्चा कमान संभालेगा और युवाओं को बीजेपी के साथ जोड़ने के लिए एक विशेष अभियान चलाएगा. इसमें सोशल मीडिया के जरिये भी बीजेपी इस तबके जोड़ने का प्रयास करेगी क्योंकि ये वो तबका है जो सूचना और संचार क्रांति के इस दौर में सब तकनीकों से भली तरह वाकिफ है सोशल मीडिया पल्त्फोर्म को भली तरह प्रयोग भी करता है. 

 

 

 

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