TDP के बाद अब गोरखा जनमुक्ति मोर्चा ने भी NDA से तोड़ा नाता, एक महीने में लगा बीजेपी को दूसरा झटका.....

24 Mar 2018
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(इमेज सोर्स:आजतक,जनसत्ता)

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव नज़दीक आते जा रहे हैं राजनीतिक समीकरण हर रोज़ बनते-बिगड़ते नजर आ रहे हैं. इस बीच पिछले एक महीने के भीतर एनडीए के लिए एक और बुरी खबर आई है. पहले टीडीपी और अब गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (GJM) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राजग (NDA) सरकार को करारा झटका दिया है. गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (GJM) ने राजग (NDA) से अपना नाता तोड़ लिया है. GJM ने बीजेपी से नाराजगी के चलते NDA से अलग होने का फैसला किया है.

GJM ने बीजेपी पर गोरखाओं का विश्वास तोड़ने का आरोप लगाया है. GJM के ऑर्गेनाइजिंग चीफ एलएम लामा ने कहा कि अब उनकी पार्टी का बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए से कोई रिश्ता नहीं हैं. गौरतलब है कि GJM पश्चिम बंगाल के बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष के हालिया बयान से बेहद खफा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी पार्टी का GJM के साथ सिर्फ चुनावी गठबंधन हैं. इसके अलावा दोनों पार्टियों के बीच किसी तरह का और समझौता नहीं हुआ है.

जीजीएम के नेता एल एम लामा ने शनिवार को एनडीए छोड़ने का एलान करते हुए कहा कि उनकी पार्टी का बीजेपी और एनडीए से कोई नाता नहीं रहा. उन्होंने गोरखा लोगों को धोखा देने का आरोप बीजेपी पर लगाया है. लामा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहा करते थे कि गोरखा लोगों का जो सपना है वो हमारा सपना है लेकिन दिलीप घोष के बयान ने पीएम के इस बयान और बीजेपी की नीयत पर से पर्दा उठा दिया है. लामा के मुताबिक दिलीप घोष के इस बयान से गोरखा समुदाय अपने को ठगा महसूस कर रहा है. उन्होंने कहा कि बीजेपी के लोग ना तो गोरखा की समस्याओं के प्रति संवेदनशील हैं और ना ही सजग.

लाना बे बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा कि हमने गठबंधन धर्म निभाते हुए पश्चिम बंगाल की दार्जिलिंग संसदीय सीट दो बार बीजेपी को उपहार में दी. साल 2009 में यहां से बीजेपी के जसवंत सिंह को और साल 2014 में एस एस अहलूवालिया को जीत दिलाई. लामा ने कहा कि दार्जिलिंग सीट पर बीजेपी उम्मीदवार को जिताने से हमें उम्मीद थी कि गोरखाओं की समस्याएं सुलझाने में बीजेपी मदद करेगी लेकिन बीजेपी ने ऐसा नहीं किया और बार-बार धोखा दिया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी की वजह से ही दार्जिलिंग और पहाड़ी इलाकों में अविश्वास का माहौल और उथल-पुथल है. दरअसल गोरखा समुदाय लंबे समय से दार्जिलिंग समेत पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्से में स्थित पहाड़ी इलाके को अलग गोरखालैंड राज्य बनाने की मांग करता रहा है. पिछले साल भी इसी मांग को लेकर जीएएम ने लंबे समय तक आंदोलन किया था.

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