4 साल बीत गए अभी वादे ही कर रही है मोदी सरकार, शुक्र है एक ही साल बचा है: राहुल गांधी

02 Feb 2018
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आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मोदी सरकार पर हमलावर हैं. वो सरकार को उसकी नीतियों पर घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ते. अब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी सरकार के केंद्रीय बजट पर तंज कसा है. उन्होंने कहा है कि चार वर्षो तक सत्ता संभालने के बाद भी मोदी सरकार अभी किसानों को उचित मूल्य देने का वादा ही कर रही है, हास्यास्पद तो यह है कि सरकार बिना फंड के ही लुभावने वादे कर रही है. साथ ही राहुल ने कहा कि ‘शुक्र है’ कि भाजपा नीत गठबंधन सरकार का केवल एक साल ही कार्यकाल बाकी बचा है.

गौरतलब है कि उन्होंने सोशल मीडिया पर ट्वीट किया, “चार वर्ष गुजर गए, वे अब भी किसानों को उचित मूल्य देने का वादा कर रहे हैं. चार वर्ष गुजर गए लुभावने वादे कर रहे हैं, जिसके लिए धन ही उपलब्ध नहीं है. चार वर्ष गुजर गए, युवाओं को रोजगार तक नहीं मिला. शुक्र है, अब केवल एक वर्ष ही बचा है.”

दरअसल नरेंद्र मोदी सरकार का आखिरी पूर्ण बजट गुरुवार (1 फरवरी) को वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लोकसभा में पेश किया. इस बजट से देश के मिडिल क्लास को बड़ी उम्मीदें थीं लेकिन जेटली ने उन्हें निराश कर दिया. जेटली ने बजट भाषण में इनकम टैक्स स्लैब में किसी तरह का बदलाव नहीं करने का ऐलान किया जबकि देश का मध्यवर्ग इनकम टैक्स स्लैब में राहत की उम्मीद लगाए बैठा था. जेटली ने नौकरीशुदा लोगों को इनकम टैक्स में कोई राहत तो नहीं दी लेकिन उन्होंने 40,000 रुपये का स्टैन्डर्ड डिडक्शन देकर उन्हें राहत के नाम पर थोड़ी सी खुशी थमाने की कोशिश की है. हालांकि, वित्त मंत्री ने आयकर पर लगने वाले उपकर को तीन फीसदी से बढ़ाकर चार फीसदी कर दिया है.

मोदी सरकार के बजट पर अब से विपक्षी दलों समेत एनडीए के भी घटक दलों कि प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गयी हैं. यहां ये बात देखने वाली है कि मोदी सरकार के इस बजट से विपक्ष तो नाराज़ है ही साथ ही एनडीए के कुछ घटक दलों ने भी नाराज़गी जताई है. आंध्र प्रदेश की सत्तारूढ़ और मोदी सरकार में शामिल तेलगु देशम पार्टी ने बजट की आलोचना की है. केंद्र में साइंस एंड टेक्नोलॉजी स्टेट मिनिस्टर वाई एस चौधरी ने कहा कि सरकार के बजट में आंध्र प्रदेश के लिए कुछ भी नहीं है. उन्होंने कहा कि इस बजट से वह नाखुश हैं. शिवसेना पहले ही बजट की आलोचना कर चुकी है. 

बहरहाल इतना साफ़ है कि ये मोदी सरकार का आखिरी पूर्णकालिक बजट था, सरकार चाहे बजट कि जितनी मर्ज़ी तारीफ़ करे लेकिन इस बजट से मिडिल क्लास को बड़ी रहत कि उम्मीद थी पर उसके हाथ कुछ नहीं लगा. अब सरकार के लिए चुनौतियाँ बड़ी हैं और उनसे पार कैसे पाना है ये अपने आप में एक बड़ा यक्ष प्रश्न है. कामकाज का केवल एक साल बचा है और जनता की उम्मीदें बेशुमार, साथ ही विपक्ष के साथ-साथ अपने घटक दल भी हमलावर.

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