राहुल की सीट को लेकर बीजेपी का पलटवार- कांग्रेस सरकार में BJP नेताओं को विशेष दीर्घा में भी जगह नहीं मिली......

27 Jan 2018
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आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): गणतंत्र दिवस परेड के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को पीछे की पंक्ति में सीट मिलने पर कांग्रेस कांग्रेस बुरी तरह भड़क गयी. उन्होंने इसे कांग्रेस के सम्मान से जोड़ दिया और इसे औछी हरक़त बताया. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने वाकायदा ट्वीट कर बीजेपी पर निशाना भी साधा. अब पलटवार कि बारी बीजेपी कि है.यानी इस मुद्दे पर बीजेपी और कांग्रेस एक बार फिर आमने सामने आ गये हैं. बीजेपी ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा है कि पार्टी के पूर्व अध्यक्षों को तो विशिष्ट दीर्घा तक में जगह नहीं दी जाती थी.

इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल बलूनी ने सवाल किया, 'कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के कार्यकाल में गणतंत्र दिवस समारोह में बीजेपी अध्यक्ष के तौर पर राजनाथ जी और नितिन गडकरी जी को कहां बैठाया जाता था.' उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासन में बीजेपी नेताओं को विशिष्ट दीर्घा में बैठने की जगह नहीं दी जाती थी, लेकिन भारतीय जनता पार्टी स्वस्थ लोकतंत्र में विश्वास रखती है, वह कांग्रेस जितना नीचे नहीं गिर सकती. दरअसल राहुल राजपथ पर आयोजित समारोह में छठी पंक्ति में बैठे थे, जिस पर कांग्रेस ने ओछी राजनीति का आरोप लगाया था. आवाज़ न्यूज़ नेटवर्क ने भी इस खबर को प्रमुखता से छापा था. मामले ने टूल पकड़ा तो पहले तो बीजेपी ने इसे सुरक्षा कारणों से उठाया गया कदम बताया लेकिन राहुल के आगे वाली पंक्तियों पर जब बीजेपी के नेता दिखे तो कई सवाल पैदा हुए. अब बीजेपी अपने आप को बेकफुट पर देखते हुए सीधे कांग्रेस पर हमलावर हो गयी है.

सुरक्षा कारण भी थी वजह 

हालांकि, सरकारी सूत्रों ने ये भी बताया है कि प्रोटोकॉल के तहत विपक्ष के नेता को सातवीं पंक्ति में सीट दी जाती है. वहीं, सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी को पहले चौथी पंक्ति की सीट आवंटित की गई थी, लेकिन बाद में SPG की अपील पर बदल दी गई. इसके बाद राहुल गांधी को चौथी के बजाय छठी कतार में बैठना पड़ा. सूत्रों का कहना है कि SPG ने सुरक्षा कारणों के चलते राहुल को ये सीट देने की अपील की थी.

बहरहाल मुद्दा अभी गर्म है और दोनों पार्टियां एक दुसरे को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं. लेकिन इतना साफ़ कि गणतंत्र दिवस जैसे शुभ मौके पर इस तरह का विवाद किसी को भी  शोभा नहीं देता है. अब क्या सरकार ने वाकई सुरक्षा कारणों से ऐसा किया या फिर बीजेपी कांग्रेस को अपने दिन याद दिलाना चाहती थी कि जब वो सत्ता में थे तो प्रमुख विपक्षी दल के साथ कैसा सलूक किया जाता था? अब लड़ाई आर-पार की है क्योंकि 2019 नज़दीक है और ये जुबानी जंग आगे क्या गुल खिलाती है और मर्यादा कि कौन कौन सी सीमाएं लांघी जाती हैं ये देखने वाली बात होगी.

 

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