हिमाचल और गुजरात का किला फतह करने के बाद बीजेपी के लिए दोनों राज्यों में बड़ा सवाल, आखिर कौन बनेगा मुख्यमंत्री???...

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): गुजरात और हिमाचल प्रदेश का किला फतह करने के बाद बीजेपी में दोनों राज्यों के लिए सीएम उम्मीदवार के लिए माथापच्ची जारी है. आज शाम भी इसे लेकर बीजेपी संसदीय दल की बैठक होगी जहाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बीजेपी का थिंक टैंक इसपर चर्चा करेगा. गौरतलब है कि गुजरात में उम्मीद से बहुत कम सीटें मिलने के कारण मुख्यमंत्री बदलने की मांग उठने लगी है वहीँ हिमाचल प्रदेश में पार्टी का मुख्यमंत्री चेहरा प्रेम कुमार धूमल थे जो खुद चुनाव चुनाव हार गये हैं. इसके बाद हिमाचल प्रदेश में भी मुख्यमंत्री पद के लिए चेहरा तलाशना बीजेपी के लिए जरूरी हो गया है.

ऐसे में अगर गुजरात की बात करें तो केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का नाम मुख्यमंत्री पद की रेस में सबसे आगे चल रहा है. उनके अलावा पुरुषोतम रुपाला, मनसुख मांडविया के नाम की भी चर्चा है. सूत्रों की मानें तो विजय रूपाणि का नाम भी इस रेस से पूरी तरह से बाहर नहीं हुआ है पर ज्यादातर लोगों की राय है कि विजय रूपाणि एक ईमानदार नेता हैं लेकिन वो गुजरात के लोगों को अपने काम से प्रभावित करने में कामयाब नहीं हो पाए हैं जिसकी वजह से पार्टी उनकी जगह किसी दूसरे चेहरे को गुजरात की कमान सौंपना चाह रही है. हालांकि पार्टी में एक धड़ा ऐसा भी है जो विजय रूपाणि को तत्काल बदलने के पक्ष में नहीं है वहीँ दूसरे धड़े का मानना है कि अगर गुजरात में नेत्रित्व परिवर्तन करना है तो इसके लिए यही सही वक़्त है. ऐसे में पार्टी आलाकमान ने ये तय किया है कि अरुण जेटली और सरोज पाण्डेय गुजरात जाकर सबसे विचार-विमर्श करके ये तय करेंगे की गुजरात का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा.

सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि रूपाणि को देर सवेर जाना ही पड़ेगा. हालांकि राजनीतिक गलियारों में स्मृति ईरानी से लेकर पुरूषोत्तम रूपाला के नाम घूमने लगे हैं, मगर बीजेपी अभी अपने पत्ते नहीं खोलना चाहती है. राष्ट्रीय प्रवक्ता विजय सोनकर शास्त्री ने कहा कि हमारे पर्यवेक्षक अरुण जेटली और सरोज पांडे गुजरात जाएंगे वहां नेताओं से मिलेंगे फिर वो रिपोर्ट देंगे फिर संसदीय बोर्ड तय करेगा कि प्रदेश का सीएम कौन बनेगा. वैसे जानकारों की राय में गुजरात के नतीजे वहां की पूरी टीम के लिए ख़तरे की घंटी हैं. राय ऐसी भी है कि अगर वहां नेतृत्व बदलना है तो इससे सही समय दूसरा नहीं होगा. 

वहीँ हिमाचल प्रदेश के लिए केन्द्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा का नाम सबसे ऊपर है, उनके अलावा हिमाचल भाजपा के वरिष्ठ नेता और सेजल से बीजेपी विधायक जयराम ठाकुर, शिमला शहरी सीट से भाजपा विधायक सुरेश भारद्वाज और नाहन से बीजेपी विधायक राजीव बिंदल का नाम भी चल रहा है. मंगलवार को पार्टी आलाकमान ने तीनों विधायकों को दिल्ली तलब भी किया था. हालांकि प्रेम कुमार धूमल का नाम भी इस रेस से पूरी तरह से गायब नहीं हुआ है. सूत्रों की मानें तो प्रेम कुमार धूमल भी मुख्यमंत्री पद के लिए अपना पूरा जोर लगा रहे हैं. लेकिन धूमल के लिए सबसे बड़ी मुसीबत ये है कि न केवल वो खुद का चुनाव हार गये हैं बल्कि उनके सहयोगी और कई करीबी लोग भी चुनाव हार गये हैं. जिनमे जोगिन्दर नगर से उनके समधी ठाकुर गुलाब सिंह, देहरा से रविंदर रवि का नाम शामिल है. जिससे पार्टी के अंदर उनका समर्थन करने वाले विधायकों की संख्या इक्का दुक्का ही रह गयी है. इसके अलावा एक और कारण जिसके चलते धूमल की दावेदारी कमजोर हुई है वो ये है कि उनके अपने जिले हमीरपुर में ही इस बार बीजेपी का प्रदर्शन बहुत बुरा रहा है. जो जिला बीजेपी का गढ़ माना जाता था उसी जिले में बीजेपी इस बार हार गयी है और कांग्रेस ने बेहतर प्रदर्शन किया है. ऐसे में अगर कोई धूमल को फिर से सत्ता में बिठा सकता है तो वो केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही हैं. क्योंकि ऐसा माना जाता है कि धूमल प्रधानमंत्री मोदी के काफी करीबी रहे हैं. जब नरेंद्र मोदी हिमाचल प्रभारी थे तब नरेंद्र मोदी और धूमल की जोड़ी ने ही हिमाचल प्रदेश में बीजेपी के सारे समीकरण बदल दिए थे. यानी धूमल की एकमात्र आस अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णय पर ही टिकी हुई है.

हालांकि  नए नामों में जेपी नड्डा का नाम मुख्यमंत्री पद के लिए सबसे ज़रूर चल रहा है, लेकिन उन्हें मुख्यमंत्री बनाने का मतलब उन्हें संसदीय बोर्ड, चुनाव समिति और कई दूसरे अहम पदों से मुक्‍त करना होगा. जिसके लिए केन्द्रीय नेत्रित्व अभी तैयार नहीं दिख रहा है. इसके अलावा पार्टी हाई कमान उत्तराखंड के बाद हिमाचल में भी ब्राह्मण को ही कमान देना उचित नहीं समझ रही क्योंकि हिमाचल में सबसे बड़ा समुदाय राजपूत है जो बीजेपी के पक्ष में रहा है. ऐसे में बीजेपी इस समुदाय की नाराज़गी मोल लेने से भी बचना चाह रही है.

बहहाल इतना तो तय है की हिमाचल में बीजेपी की सरकार बन गयी है और जल्द ही मुख्यमंत्री कौन होगा इस रहस्य से पर्दा भी उठ जायेगा, लेकिन इतना तय है कि अब सारी लड़ाई 2019 के मद्दे नज़र है और इसी बात के मद्देनजर सारे निर्णय लिए जायेंगे. अब देखना ये है कि क्या बीजेपी प्रेम कुमार धूमल को ही मुख्यमंत्री बनाती है या फिर कोई नया चेहरा आगे लाकर हिमाचल प्रदेश की राजनीति को एक नये मोड पर ले जाने का निर्णय करती है.  

 

Rate this item
(3 votes)

Latest from Super User

2856 comments

Leave a comment

Make sure you enter the (*) required information where indicated. HTML code is not allowed.