कांग्रेस में आज से नए युग की शुरुआत, राहुल गांधी बने कांग्रेस अध्यक्ष

11 Dec 2017
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आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): कांग्रेस में आज से नए युग की शुरुआत हो गई है. गाँधी खानदान की अगली पीढ़ी ने पार्टी की कमान मिल गई है, या साफ़ शब्दों में कहें तो राहुल गांधी अब कांग्रेस अध्यक्ष बन गए हैं. सोमवार दोपहर पार्टी की ओर से यह बड़ा ऐलान कर दिया गया. कांग्रेसी नेता मुल्लापल्ली रामचंद्रन ने बताया कि राहुल को निर्विरोध अध्यक्ष चुना गया. उन्होंने बताया कि राहुल के पक्ष में 89 नामांकन प्रस्ताव मिले थे. सभी के सभी वैध मिले. रामचंद्रन ने कहा कि चूंकि एक ही प्रत्याशी का नामांकन मिला, इसलिए राहुल गांधी को इंडियन नैशनल कांग्रेस का अध्यक्ष चुन लिया गया.

गौरतलब है कि राहुल गांधी अब अपनी मां सोनिया गांधी की जगह लेंगे जो पिछले 19 सालों से पार्टी की कमान संभाल रही थीं, लेकिन बीते कुछ वक्त से उनकी तबीयत खराब चल रही थी. ऐसे में पार्टी के अंदर से बार-बार ये आवाज़ उठ रही थी कि राहुल को पार्टी की कमान दे देनी चाहिए. हालांकि पार्टी में एक धड़ा ऐसा भी था जो ये चाहता था कि सोनिया गाँधी 2019 तक के लोकसभा चुनाव तक पार्टी अध्यक्ष बनी रहे. लेकिन सोनिया ने भी वक़्त की नब्ज़ को टटोलते हुए राहुल के हाथों में पार्टी की कमान को देना उचित समझा. 

राहुल गांधी ऐसे वक्त में अध्यक्ष का कमान संभालने जा रहे हैं, जब पार्टी को लगातार हार का सामना करना पड़ रहा है. पार्टी के हाथ में अब चंद राज्यों में ही सत्ता बची हुई है. राहुल गांधी के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी कार्यकर्ताओं के मनोबल को उठाना होगा. आक्रामक बीजेपी के कांग्रेस मुक्त भारत अभियान से निपटना भी बड़ी चुनौती होगी. जानकारों की मानें तो राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद संगठन में भारी फेरबदल के आसार जताए जा रहे हैं, जिसकी वजह से कांग्रेस संगठन में कुछ युवाओं को तरजीह दी जा सकती है, वहीँ कुछ पुराने नेताओं को किनारे किया जा सकता है. 

हालाँकि राहुल गांधी के अध्यक्ष चुनाव पर विवाद भी हो चुका है. अपनी ही पार्टी के नेता शहजाद पूनावाला ने चुनाव प्रक्रिया में धांधली का आरोप लगाया था, जिसे लेकर बीजेपी और पीएम नरेंद्र मोदी ने भी कांग्रेस पर तीखे हमले किए थे. वहीं, सोशल मीडिया पर आलोचकों का कहना है कि अध्यक्ष चुनाव का नतीजा पहले से ही फिक्स्ड है और परिवारवाद के तहत राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाया जा रहा है. कांग्रेस ने इसे लेकर बीजेपी पर पलटवार भी किया था. कांग्रेस ने पूछा था कि बीजेपी में कब अध्यक्ष पद के मतदान हुए हैं? बता दें कि भारतीय जनता पार्टी के अस्तित्व में आने के बाद से ही आज तक अध्यक्ष पद के लिए भी एक बार भी मुकाबला नहीं हुआ. पार्टी का कहना है कि अध्यक्ष पद के लिए आम सहमति बनाने के बाद ही उम्मीदवार का नाम आगे बढ़ाया गया.

बहरहाल अब इतना साफ़ है कि कांग्रेस की नई पीढ़ी ने कमान अपने हाथों में ले ली है. अब पार्टी को राहुल अपने हिसाब से आगे बढ़ाएंगे, लेकिन उनके सामने चुनौतियाँ भी कम नहीं हैं. उन्हें अपने इतिहास में अबतक हाशिये पर चली गयी पार्टी में नये प्राण फूंकने होंगे. युवाओं को ये यकीन दिलाना होगा कि कांग्रेस उन्हें साथ लेकर आगे बढ़ेगी और उनके हित के लिए कदम उठाएगी. क्योंकि ये वो तबका है जिसने नरेंद्र मोदी को 2014 के लोकसभा चुनाव में अपना वोट दिया था. साथ ही लोकसभा में भी सारे विपक्ष को एकसाथ लेकर सरकार के ऊपर दवाब बनाना होगा जिससे लोकहित के मुद्दें कहीं गुम न हो जाएँ.

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