मोदी को नीच कहने पर मणिशंकर अय्यर सस्पेंड, बड़ा सवाल: कहीं राहुल की मेहनत पर पानी न फेर दे ये बयान ? Featured

08 Dec 2017
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आवाज़(मुकेश शर्मा): कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर अपने कामों के लिए कम और बदजुबानी के लिए ज्यादा जाने जाते हैं. कभी प्रधानमंत्री मोदी को चाय वाला कहकर चिढ़ाने वाले अय्यर ने लगता है अब मर्यादा की सारी हदें पार करते हुए प्रधानमंत्री मोदी के लिए नीच शब्द का इस्तेमाल किया. लेकिन ऐसा कहते ही न केवल वो विरोधियों के निशाने पर आगये बल्कि कांग्रेस पार्टी ने भी उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया. इतना ही नहीं शाम होते-होते कांग्रेस पार्टी को भी उन्हें ससपेंड करना पडा. पार्टी ने उन्हें प्राथमिक सदस्यता से निलंबित कर दिया. क्योंकि राहुल ये भली-भाँती जानते हैं कि अगर मोदी पर कोई निजी प्रहार हुआ तो गुजरात में हुई उनकी अबतक की मेहनत पर पानी फिर जाएगा. लेकिन बड़ा सवाल अब भी बना हुआ है कि क्या मणिशंकर का ये ब्यान राहुल की गुजरात में की गयी अबतक की मेहनत पर पानी तो नहीं फेर देगा. जानकारों की मानें तो मणिशंकर अय्यर की फिसली जुबान ने बीजेपी को संजीवनी दे दी है और गुजरात में कांग्रेस के जीत का जायका बिगड़ता हुआ नजर आ रहा है.

दरअसल मणिशंकर अय्यर ने गुरुवार को नरेंद्र मोदी के लिए 'नीच' शब्द का इस्तेमाल किया. इसके बाद बीजेपी ने अय्यर के बयान को लेकर कांग्रेस को कठघरे में खड़ा करना शुरू कर दिया. हालांकि, कांग्रेस ने कुछ घंटे के अंदर ही अय्यर को निलंबित कर दिया लेकिन जो सियासी माहौल बना बीजेपी ने उसे हवा दे दी. अय्यर ने पीएम मोदी के उस बयान पर प्रतिक्रिया देने के दौरान यह टिप्पणी की थी जिसमें पीएम मोदी ने कहा था कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी बाबा अंबेडकर को नहीं जानते हैं, बाबा भोले को जानते हैं.

बीजेपी ने मणिशंकर अय्यर के ब्यान को सियासी हवा देने में एक मिनट नहीं गवाया. हालांकि राहुल गाँधी ने वक़्त की नब्ज़ को भांपते हुए अय्यर को मोदी जी से माफ़ी मांगने की नसीहत दे दी जो शाम होते-होते अय्यर के पार्टी से निलंबन में तब्दील हो गयी, लेकिन अब बीजेपी इस मुद्दे को लेकर आक्रामक हो गयी है. इसका एक उदहारण तब देखने को मिला जब प्रधानमंत्री मोदी ने सूरत की चुनावी रैली में कहा, 'अय्यर कहते हैं कि मोदी नीच जाति का है. ये गुजरात का अपमान है. मुगल संस्कार वालों को मेरे अच्छे कपड़े पहनना सहन नहीं होता है. आपने हमें गधा और गंदी नाली का कीड़ा कहा. 18 तारीख को मतपेटियां बताएगी कि गुजरात के बेटे के अपमान का बदला कैसे लिया जाता है.'

मतलब साफ़ है बीजेपी जो अबतक गुजरात में राहुल-अल्पेश-और जिग्नेश की तिगडी का तोड़ नहीं ढूँढ पा रही थी, उसके लिए अय्यर ने बैठे-बैठाए संजीवनी दे दी. हालांकि पीएम मोदी इससे पहले भी गुजरती अस्मिता की बात उठा रहे थे लेकिन उनकी रैलियों से कहीं ज्यादा भीड़ कांग्रेस के पक्ष में दिख रही थी जो नज़ारा अब कुछ बदला-बदला नज़र आ रहा है. मौजूदा दौर में नरेंद्र मोदी पर व्यक्तिगत तौर पर हमला करने का नतीजा कांग्रेस के लिए परेशानी का सबब बन सकता है. क्योंकि मोदी पर जब भी व्यक्तिगत हमले हुए हैं, उससे वो और भी मजबूत हुए हैं. 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले इसी मणिशंकर अय्यर ने मोदी के लिए ‘चायवाला’ शब्द का प्रयोग किया था. बीजेपी ने इसे मुद्दा बनाया और कांग्रेस का हश्र क्या हुआ है ये जगजाहिर है. ऐसे में अब गुजरात के सियासी रण में एक बार फिर अय्यर का पार्ट टू आया है. इसका नतीजा क्या होगा. ये तो 18 तारीख को ही पता चलेगा. फिलहाल राहुल गांधी को पसीने आना लाजिमी है क्योंकि वो ये बात भली-भाँती जानते हैं की अगर गुजराती मानुष के अंदर अगर गुजराती अस्मिता जाग गयी तो कांग्रेस को लेने के देने पड़ जायेंगे और उनकी सारी मेहनत पर पानी फिरते देर नहीं लगेगी.

प्रियंका गाँधी भी कर चुकी हैं इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल

हालांकि नरेंद्र मोदी के खिलाफ इस तरह के शब्दों का इस्तेमाल प्रियंका गांधी भी कर चुकी हैं. मामला साल 2014 का है, जब अमेठी में प्रचार के दौरान प्रियंका गांधी ने मोदी पर अपने पिता का अपमान करने का आरोप लगाया था. उन्होंने नरेंद्र मोदी पर निचले स्तर की राजनीति करने का आरोप लगाया था. इसपर उनके खिलाफ भाजपा नेताओं ने शिकायत दर्ज कराई थी. उस वक़्त भी प्रधानमंत्री मोदी ने इस मुद्दे पर जवाब दिया था. उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा था ‘सामाजिक रूप से निचले वर्ग से आया हूं इसलिए मेरी राजनीति उन लोगों के लिए ‘नीच राजनीति’ ही होगी.’

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