अब सुब्रमण्यन स्वामी की फिसली जुबान, कहा: मुस्लिम बेशर्म, 800 साल राज करने के बाद कर रहे पिछड़ा कहलाने की मांग Featured

22 Nov 2017
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आवाज़(रेखा राव, दिल्ली): बीजेपी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यन स्वामी अपने बयानों के कारण हमेशा सुर्ख़ियों में रहते हैं. ऐसा मौका अब एक बार फिर से आया है. दरअसल स्वामी ने ऑल इंडिया मज्लिस ए इतेहदुल मुसलिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी पर जोरदार हमला बोलते हुए मुस्लिमों को बेशर्म बताया है. उन्होंने कहा कि जिन्होंने देश में 800 सालों तक राज किया है वह अगर खुद को अगर पिछड़ा कहते हैं तो यह उनके लिए शर्म की बात है. टाइम्स नाउ के मुताबिक स्वामी ने कहा कि देश में ब्राह्मण गरीब हैं, क्षत्रिय भी गरीब हैं, वे लोग आरक्षण की मांग नहीं कर रहे हैं, लेकिन मुस्लिम बेशर्मों की तरह आरक्षण की बात कह रहे हैं. हमारे देश पर 800 सालों तक राज करने के बाद, देश को 800 सालों तक लूटने के बाद अब वे पिछड़ा कहलाने की मांग कर रहे हैं. किसी भी केस में आप धार्मिक रूप से पिछड़ापन तय नहीं कर सकते, लेकिन अगर ओवैसी वास्तव में किसी पिछड़े व्यक्ति का नाम बताते हैं तो हम उन्हें स्कॉलरशिप दे सकते हैं और दूसरे रूप में उनकी मदद कर सकते हैं. ओवैसी को काशी राम के जैसा सोचना चाहिए, काशी राम ने अनुसूचित जातियों से कहा था कि आरक्षण के बारे में मत सोचो, शक्ति और ताकत के बारे में सोचो.

गौरतलब है कि ओवैसी ने ट्वीट कर मुस्लिमों के आरक्षण की बात कही थी. उन्होंने कहा था कि कांग्रेस पाटीदारों को आरक्षण देने पर राजी हो गई है, लेकिन मुस्लिमों को आरक्षण देने के लिए कुछ नहीं किया जो कि सामाजिक और शैक्षिक रूप से पिछड़े हैं.

दरअसल गुजरात विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस और पाटीदार अनामत आंदोलन समिति के बीच पाटीदार समाज को आरक्षण दिए जाने के फार्मूले पर सहमति बन गई है. इस बात की जानकारी पाटीदार नेता हार्दिक पटेल ने दी अहमदाबाद में पत्रकारों से बातचीत करते हुए दी थी. पटेल ने कहा था कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) दो दशकों से अधिक समय से राज्य की सत्ता में है और उसके खिलाफ लड़ाई लड़नी जरूरी है. पटेल द्वारा कांग्रेस की सहमति के ऐलान किए जाने के बाद ओवैसी ने ट्वीट कर अपना गुस्सा जाहिर किया था और मुस्लिमों के आरक्षण के लिए मोर्चा खोलने का काम किया था.

मुद्दा आरक्षण से जुड़ा हुआ है तो भला ऐसे में असदुद्दीन ओवैसी कहाँ पीछे रहते. उन्होंने कांग्रेस और पटेल समुदाय के बीच हो रहे समझौते को देखते हुए मुसलामानों के लिए भी आरक्षण के मुद्दे को गरमाकर एक नया मोर्चा खोलने की कोशिश की, लेकिन वो सुब्रमण्यम स्वामी के निशाने पर आ गये. अब मुद्दा ऐसा है जिसपर राजनीति की जा सकती है तो राजनीतिज्ञ कहाँ पीछे रहते. उम्मीद है कि स्वामी की ये प्रतिक्रिया अपना रंग दिखाएगी और तमाम राजनीतिक पार्टियाँ अब एक दूसरे को नीचा और अपने आप को बेहतर दिखाने की कोशिश भी करेंगी. अब मुद्दा गरमाता कितना है और कौन कितना स्वाद लेता है ये देखने वाली बात होगी.(इनपुट:जनसत्ता)

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