सवाल गुजरात के, जवाब अमेठी में, राहुल के खिलाफ बीजेपी ने बनाई ये रणनीति Featured

आवाज़(रेखा राव, दिल्ली): कांग्रेस के युवराज अब महाराज मतलब कांग्रेस के अध्यक्ष बनने जा रहे हैं. हिमाचल और गुजरात चुनाव भी सर पर है. जिसके लिए कांग्रेस ने आक्रामक रणनीति भी बनाई हुई है. राहुल पहले अमेरिका गये जहां उन्होंने अपनी पार्टी की हार के लिए कांग्रेस में अहम आने की बात कही. फिर जब स्वदेश लौटे तो अपने मिशन गुजरात पे निकल गये. अब वो गुजरात में तूफानी दौरे कर रहे हैं. बार बार मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं. मोदी के विकास को पागल बता रहे हैं. गुजरात जाकर गुजरातियों की बात कर रहे हैं. अपनी इस रणनीति में वो कामयाब होते हुए भी दिख रहे हैं. उन्हें भली भाँती ये पता है कि इस वक़्त गुजरात में माहौल उनके पक्ष में है जिसे वो हर हाल में वोटों में तब्दील करना चाह रहे हैं. लेकिन बड़ा सवाल ये है कि भाजपा क्या कर रही है. उन्होंने कांग्रेस की इस रणनीति  से निपटने के लिए क्या योजना बनाई है. तो जवाब हम आपको दे देते हैं. और इस जवाब ये है कि सवाल गुजरात के हैं तो जवाब अमेठी में मिलेगा. यही बीजेपी की रणनीति है. जहां कांग्रेस गुजरात का किल्ला फतह करके पूरे देश को ये बताना चाहती है कि मोदी का जादू अब ख़त्म हो गया है वहीँ बीजेपी अमेठी में राहुल की सियासी ज़मीन को हिलाकर पूरे देश को ये सन्देश देना चाहती है की अमेठी जो कांग्रेस की पैत्रिक सीट रही है वहां की जनता ने ही राहुल को नकार दिया है. जंग छिड़ी हुयी है. दोनों पार्टियाँ हमलावर हैं. बीजेपी नेहरू-गांधी परिवार की अमेठी में राहुल की चूलें हिलाकर इस पार्टी के मनोबल को गहरी चोट देने की कोशिश में है. गुजरात में भगवा शासन को ललकार रहे राहुल की अमेठी को लेकर भाजपा की आक्रामकता कुछ यही इशारा करती है. जानकारों की मानें तो राहुल गुजरात जाकर सत्ताधारी दल पर जो प्रहार कर रहे हैं, भाजपा अमेठी में उसकी जवाबी चोट दे रही है. पिछली 10 अक्तूबर को अमेठी में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और पिछले लोकसभा चुनाव में इसी क्षेत्र से राहुल को कड़ी टक्कर देने वाली केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का कार्यक्रम इसी मकसद से हुआ, ताकि राहुल को गुजरात का जवाब अमेठी से दिया जाए.

इस बात की पुष्टि प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के वक्फ राज्यमंत्री और अमेठी के प्रभारी मंत्री मोहसिन रजा ने  भी की. गुजरात का जवाब अमेठी से देने की भाजपा की रणनीति के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि अमेठी तो कांग्रेस का गढ़ रही है. दादी से लेकर पापा और पापा से लेकर बेटा तक इस सीट से संसद पहुंचे हैं, लेकिन इस बार अमेठी लोकसभा क्षेत्र की जनता पूरी तरह भाजपा के पक्ष में जाती दिख रही है. आने वाले समय में हम अमेठी में और अधिक सक्रियता दिखाएंगे. रजा ने कहा कि प्रभारी मंत्री के रूप में उन्होंने अमेठी की दुर्दशा देखी है. कोई चुनाव ना होने के बावजूद इतनी बड़ी भीड़ का अमित शाह को सुनने के लिए पहुंचना, यह जाहिर करता है कि राहुल गांधी को अमेठी की अवाम ने खुदा हाफिज कह दिया है. राहुल गांधी को इस बार कोई दूसरी सीट तलाशनी होगी, क्योंकि अमेठी की जनता अब ये समझ गयी है कि इस परिवार ने उन्हें उल्लू बनाकर केवल अपना मतलब साधा है.

जानकारों की माइएँ तो बीजेपी की ये रणनीति सीधे तौर पर राहुल को निरुत्तर करने के लिए अपनाई जा रही है, क्योंकि राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के गढ़ में विकास के मुद्दे पर उनकी सरकार को घेर रहे हैं. राहुल जहां गुजरात में विकास के मुद्दे पर भाजपा को घेर रहे हैं, वहीं शाह अमेठी की जनता की तरफ से राहुल से पिछली तीन पीढ़ियों का हिसाब मांग रहे हैं. भाजपा यह दिखाने की कोशिश कर रही है कि उसके विकास पर तंज करने वाले राहुल और उनके परिवार ने आखिर अपने गढ़ अमेठी को तरक्की के नाम पर क्या दिया है. राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक अमेठी निश्चित रूप से भाजपा के लिए बड़ा मंसूबा है और वह पिछले लोकसभा चुनाव में राहुल को चौंकाने वाली स्थितियों को पैदा करने के बाद अब उन्हें सर-ए-अंजाम पर पहुंचाना चाहती है. हार के बावजूद स्मृति ईरानी की अमेठी में लगातार सक्रियता और भाजपा अध्यक्ष का यह कहना कि 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा इन बिंदुओं पर चुनाव नहीं लड़ेगी कि वह यहां कौन-कौन से विकास कार्य करेगी, बल्कि इस बुनियाद पर लड़ेगी कि उसने यहां अब तक क्या-क्या विकास कार्य कर डाले हैं.

पिछले लोकसभा चुनाव में स्मृति को बहुत कम समय रहते अमेठी से भाजपा का उम्मीदवार बनाया गया था. हालांकि वह हार गईं लेकिन राहुल के जीत के अंतर में वर्ष 2009 के मुकाबले दो लाख से ज्यादा मतों की गिरावट ने भाजपा को नेहरू-गांधी परिवार के गढ़ में सेंध लगाने की उम्मीद जरूर दे दी. स्मृति चुनाव जरूर हार गईं लेकिन उन्होंने अमेठी की जनता से वादा किया था कि वह उससे अपना नाता नहीं तोड़ेंगी. पिछले साढ़े तीन साल के दौरान स्मृति ने अमेठी के लगातार दौरे किए और केंद्र की अनेक योजनाओं को पहुंचाकर अपनी जमीन तैयार करती रहीं. वर्ष 2019 में अमेठी से चुनाव लड़ने पर उनकी उम्मीदवारी पांच साल पुरानी होगी.

 

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