चीन की एतिहासिक यात्रापर नरेंद्र मोदी, बोले: अगर भारत और चीन मिल जाएँ तो दुनिया में सुलझ जायेंगी बहुर सारी समस्याएं....

27 Apr 2018
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आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन की एतिहासिक यात्रा पर हैं, जहाँ आज शुक्रवार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच चीनी शहर वुहान में दो दिवसीय अनौपचारिक वार्ता की शुरू हो गई. मोदी चीन के समयानुसार दोपहर करीब 3.30 बजे हुबेई प्रांतीय संग्रहालय पहुंचे. वहां मोदी ने अपने चिरपरिचित अंदाज़ में 30 सेकेंड तक बड़ी ही गर्मजोशी से शी जिनपिंग से हाथ मिलाया. जिससे दुनिया को ये सन्देश देने की कोशिश की गई की चाहे भारत और चीन में कितने भी विवाद हों लेकिन दोनों देश सारे विवादों को एक तरफ रखते हुए और एक-दूसरे को समझते हुए आगे बढ़ सकते हैं.

गौरतलब है कि शी जिनपिंग और मोदी शाम छह बजे एक और बैठक में हिस्सा लिया.  इस दौरान दोनों देशों का प्रतिनिधि मंडल भी मौजूद था. प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति के बीच मुलाकात में दोनों देशों के प्रतिनिधि भी शामिल रहे. भारत की तरफ से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल भी इस मुलाकात के दौरान मौजूद रहे. प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद पीएम मोदी ने कहा कि भारत और चीन विश्व शांति के लिए अहम भूमिका निभा सकते हैं. पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देश साथ मिलकर चलने को तैयार हैं. उम्मीद है कि बैठाक के बाद कई ऐसे मुद्दे होंगे जिनपर दोनों देशों में एकराय बनेगी और भारत और चीन व्यापार के साथ-साथ अपे मतभेदों को भुलाने के लिए भी आगे ल्द्म बढ़ाएंगे. इसके बाद शी जिनपिंग की मेजबानी में रात्रिभोज का आयोजन किया जाएगा. वहीँ वार्ता के दूसरे दिन यानी शनिवार को दोनों नेता ईस्ट लेक जाएंगे और नौका की सवारी करेंगे. इस दौरान ईस्ट लेक गेस्टहाउस में दोनों नेताओं के बीच कई मुद्दों पर चर्चा भी होगी. गौरतलब है कि चीन के वुहान शहर में मोदी और जिनपिंग के बीच यह अपनी तरह की अनोखी मुलाकात है, जो द्विपक्षीय संबंधों की नई शुरुआत का संकेत है. 

इससे पहले हुबेई म्यूजियम में रंगारंग कार्यक्रमों की प्रस्तुति के साथ पीएम मोदी का स्वागत किया गया. वहीँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच ऐसा अनौपचारिक मुलाकातें और समिट एक परंपरा की तरह आयोजित होते रहने चाहिए. मुझे खुशी होगी, अगर 2019 में भारत में इस तरह की अनौपचारिक समिट का आयोजन हो. मोदी ने कहा कि ये भारतियों के लिए गर्व की बात है और मैं भारत का पहला ऐसा प्रधानमंत्री हूं जिसकी अगवानी के लिए आप (शी जिनपिंग) दो-दो बार राजधानी से बाहर आए हैं. पीएम ने कहा कि यह भारत के प्रति आपका प्यार और सम्मान दर्शाता है. उन्होंने कहा कि न्यू इंडिया और न्यू एरा की कोशिश दुनिया के हित में है क्योंकि दुनिया की 40 फीसद आबादी इन्हीं दो देशों में रहती है. पीएम मोदी ने कहा कि भारत-चीन मिलकर दुनिया को कई समस्याओं से निजात दिला सकते हैं.

शी जिनपिंग से मीटिंग के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पुराने दिन भी याद किए. उन्होंने कहा, 'जब मैं गुजरात का मुख्यमंत्री था, तब मुझे वुहान आने का गौरव प्राप्त हुआ. मैंने यहां के बांध के बारे में बहुत सुना था. जिस स्पीड से आपने (शी जिनपिंग) बांध का निर्माण कराया, उसने मुझे प्रेरित किया. मैं एक स्टडी टूर पर आया था और बांध पर एक दिन बिताया.' पीएम मोदी ने कहा, 'चीन और भारत की संस्कृति नदी के किनारों पर आधारित रही है. अगर हम मोहनजोदड़ो और हड़प्पा संस्कृति की बात करें, तो सारा विकास नदियों के किनारे ही हुआ है.' इस मुलाकात को 'दिल से दिल को जोड़ने वाली पहल' करार दिया जा रहा है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों के कुछ अति विवादास्पद मुद्दों पर सहमति की राह खोजना है. मोदी और शी जिनपिंग शुक्रवार को दिन के भोजन के बाद अकेले में बैठक करेंगे.

वहीँ पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने उम्मीद जताई है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच दो दिवसीय अनौपचारिक शिखर सम्मेलन दोनों सेनाओं के बीच संबंधों को स्थिर बना सकता है. चीनी सेना के मुताबिक, सीमाओं पर शांति बनाए रखने में मदद कर सकता है और मतभेदों को सुलझा सकता है. गौरतलब है कि साल 2014 में सत्ता में आने के बाद मोदी की यह चौथी चीन यात्रा है. इसके बाद वह 9 और 10 जून को क्विंगदाओ शहर में होने जा रहे एससीओ शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने चीन जा सकते हैं. (सौजन्य :आजतक डॉट इन)

 

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