यूएन में पाकिस्तानी पीएम के भाषण पर भारत का पलटवार - आतंकियों की पनाहगाह है पाकिस्तान Featured

22 Sep 2017
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आवाज़ ब्यूरो(दिल्ली): पाकिस्तान के  नए नवेले प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी भारत के खिलाफ उसी नीति को अपनाए हुए हैं जो उनकी पुराणी सरकारों ने अपनाई थी, और वो ये है कि भारत में आतंकवाद फईलाओ और फिर पूरे विश्व में भारत की बुराई करो. और अगर ऐसे में मंच अंतर्राष्ट्रीय हो तो भला जनाब कैसे पीछे रह सकते हैं. ऐसा ही कुछ देखने को मिला जब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने यूनाइटेड नेशन में पहली बार भाषण दिया. जिसमें उन्होंने फिर से पिछली सरकारों की नीति को दोहराते हुए कश्मीर पर विशेष ध्यान दिया. उन्होंने भारत पर आरोप लगाया कि भारत कश्मीरियों के संघर्ष को बेरहमी से दबा रहा है. कश्मीरी भारतीय सेना के जुल्मोसितम का शिकार हो रहे हैं. लेकिन दांव यहाँ भी उल्टा पड़ा, अब्बासी के इस भाषण का भारत ने मुंहतोड़ जवाब दिया. भारत ने कहा कि पाकिस्तान अब टेररिस्तान बन चुका है. यह बहुत ही आसाधारण बात है कि पाकिस्तान ओसामा बिन लादेन और मुल्लाह ओमार जैसे आतंकिया को पनाह देता है और खुद को पीड़ित बताता है. इतिहास पर नज़र डालें तो पाकिस्तान आतंक का पर्याय बन गया है,जो केवल अपने लिए ही नही बल्कि पूरे विश्व के लिए खतरा बन चुका है. भारत ने हैरानी जताई कि जिस देश के नाम का अर्थ पवित्रता है, अब वह जगह आतंकवाद की जननी बन गई है.

 

गौरतलब है कि गुरुवार को यूनाइटेड नेशन की भारतीय सेक्रेटरी ईनाम गंभीर ने कहा कि दुनिया में आतंकवाद को फैलाने और आतंकी बनाने वाली इंडस्ट्री के बाद अब पाकिस्तान टेररिस्तान बन गया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को यह समझना चाहिए कि जम्मू एंड कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है. पाकिस्तान चाहे जो मर्ज़ी कर ले वो भारत की अखंडता को कभी भंग नही कर पायेगा. गंभीर ने कहा कि पाकिस्तान ने हाफिज़ मोहम्मद सईद को पनाह दी है जिसे यूएन ने लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी घोषित किया है, लेकिन पाकिस्तान ये सब होने के बाद भी सबक लेने को राज़ी नही है. हद तो तब हो गयी जब वो एक राजनीतिक पार्टी का नेता बन गया. ऐसे लोगों से क्या शान्ति की उम्मीद की जा सकती है? उन्होंने पाकिस्तान को सख्त लहजे में कहा कि आप बेशक सीमा पार से कितना भी आतंकवाद को बढ़ावा दे दें, फिर भी भारत की अखंडता को विभाजित नही कर पाएंगे.

 

गंभीर ने कहा कि पाकिस्तान में दंड-मुक्त होने के बाद आतंकी वहां की सडकों पर खुलेआम घूमते हैं और हमें भारत में मानवाधिकार के लेक्चर देते हैं. खुद आतंकवाद फैलाते हैं,मासूमों और मजलूमों का खून बहते हैं और हमें लेक्चर देते हैं. दुनिया को ऐसे देश से लोकतंत्र और मानवाधिकारी पर सीख लेने की जरुरत नहीं हो जिसकी स्थिति खुद चैरिटेबल बनी हुई है.

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