Items filtered by date: Saturday, 03 November 2018

आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): हरियाणा के सबसे पुराने सियासी घरानों में से एक चौटाला परिवार की लड़ाई पहले जगजाहिर हुई और अब वर्चस्व की ये जंग एक ऐसे मुकाम पर पहुँच गई जहाँ से ये सवाल उठना लाजिमी हो गया कि क्या अब इस सियासी घराने का भी सूरज डूबने की कगार पर है..... दरअसल इंडियन नेशनल लोकदल सुप्रीमो चौधरी ओम प्रकाश चौटाला ने अपने पोतों दिग्विजय और दुष्यंत को अनुशासनहीनता के आरोपों के बाद पार्टी से निकाल दिया है.... ख़ास बात ये है कि अनुशासनहीनता के आरोपों को झेल रहे दिग्विजय और दुष्यंत के खिलाफ चौधरी ओम प्रकाश चौटाला ही गवाह बने हैं जिसके परिणामस्वरूप हिसार से सांसद दुष्यंत चौटाला को को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया गया है वहीँ  दिग्विजय चौटाला इनसो के राष्ट्रिय अध्यक्ष पद से तुरंत प्रभाव से बाहर कर दिया गया है.... एक और गौर करने वाली बात ये है कि आमतौर पर अगर किसी को भी पार्टी से बाहर निकला जाता है तो उसमे कुछ समयसीमा तय होती है लेकिन इन दोनों के मामले में कोई समयसीमा तय नहीं की गई है यानी मतलब साफ़ है कि ओम प्रकाश चौटाला के इस कदम के बाद अब इनेलो की बागडोर अभय चौटाला के हाथों में रहेगी......और वो अपने हिसाब से पार्टी को चलाएंगे..... इनेलो सुप्रीमो ने ये कदम अपने ज्येष्ठ पुत्र अजय चौटाला के तिहाड़ जेल से बाहर आने से ठीक एकदम पहले उठाया है....साथ ही इनेलो सुप्रीमो ने दुष्यंत और दिग्विजय को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी निष्कासित कर दिया है.....

गौरतलब है कि चौटाला परिवार के अभय चौटाला और दुष्यंत चौटाला के बीच पिछले काफी समय से वर्चस्व की ये जंग चल रही थी....सूबे में कई जगह से कार्यकर्ताओं के बीच बार-बार दुष्यंत को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने की मांग उठ रही थी....लेकिन पार्टी ने ऐसा नहीं किया.... जिसके परिणामस्वरूप 7 अक्टूबर को गोहाना में चौधरी देवीलाल के जन्मदिवस के मौके पर आयोजित एक रैली में परिवार की ये जंग सार्वजनिक तौर पर सामने आई.... रैली के दौरान अभय चौटाला के भाषण के दौरान जबरदस्त हूटिंग हुई और उन्हें बोलने नहीं दिया गया....जिससे पार्टी सुप्रीमो ओम प्रकाश चौटाला काफी आहत हुए और उन्होंने दुष्यंत और दिग्विजय को इसके पीछे जिम्मेवार मानते हुए उन्हें 11 अक्टूबर को एक नोटिस जारी करते हुए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निलम्बित कर दिया....बाद में इस मामले को शमशेर सिंह बद्गामी की अध्यक्षता वाली अनुशासन समिति के पास भेजा गया जहाँ दिग्विजय और दुष्यंत को दोषी पाया गया....

सांसद बने रहेंगे दुष्यंत.....

हालांकि इनेलो सुप्रीमो के इस कदम के बाद भी दुष्यंत सांसद बने रहेंगे...नियमों के मुताबिक अगर वो खुद पार्टी छोड़ते तो उन्हें लोकसभा की सदस्यता से भी इस्तीफ़ा देना पड़ता लेकिन यहाँ पार्टी ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया है तो ऐसे में वे सांसद बने रहेंगे....

इनेलो में शुरू हुआ इस्तीफों का दौर.....

इनेलो सुप्रीमो के इस कदम के बाद पार्टी में अजय चौटाला के गुट के कई बड़े नेता नाराज़ बताये जा रहे है... जिसके चलते अब पार्टी में इस्तीफों का दौर शुरू हो गया है.....पुण्डरी से इनेलो के पूर्व विधायक मक्खन सिंह ने पार्टी हाई-कमान के इस कदम के बाद फैसले के विरोध में अपना इस्तीफ़ा दे दिया है.... उनके बेटे और पार्टी के लीगल सेल के प्रधान रहे रणदीप कॉल ने भी पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया है.... साथ ही इनसो प्रदेशाध्यक्ष प्रदीप देशवाल ने भी इनेलो को अलविदा कह दिया है.... ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि अब पार्टी में इस्तीफों का दुआर और तेज़ होगा और दुष्यंत और दिग्विजय से सम्बन्धित कई पार्टी अधिकारी इनेलो को अलविदा कह सकते हैं....जो निश्चित तौर पर इनेलो के लिए एक बहुत बड़ा झटका साबित होगा साथ ही अगर पार्टी दो धड़ों में बंट जाती है लम्बे समय बाद सत्ता में आने की उम्मीद भी धरी की धरी रह जायेगी....

दुष्यंत और दिग्विजय को पार्टी से बाहर करना मेरे लिए सबसे कठिन फैसला: ओम प्रकाश चौटाला....

वहीँ इनेलो सुप्रीमो चौधरी ओम प्रकाश चौटाला ने कहा है कि दुष्यंत और दिग्विजय को पार्टी से बाहर करना उनके लिए बहुत मुश्किल फैसला था.... लेकिन मैं अपने सम्पूर्ण जीवन में जननायक चौधरी देवीलाल के सिद्धांतों का पालन करता रहा हूँ इसलिए मेरा मानना है कि पार्टी हमेशा परिवार से बड़ी होती है....मैंने पार्टी से कहा है कि दुष्यंत और दिग्विजय का निष्कासन तुरंत प्रभाव से लागू हो.....गौरतलब है कि इनेलो सुप्रीमो ओम प्रकाश चौटाला की तबियत अभी ख़राब चल रही है जिसके चलते वो लोकनायक जय प्रकाश नारायण अस्पताल में भर्ती हैं.....

पार्टी हितैषियों और समर्थकों को अब अंतिम उम्मीद अजय चौटाला से....

इनेलो के इस बिखराव के बाद पूरे हरियाणा में इनेलो के समर्थकों में मायूसी छाई हुई है... सब जगह इनेलो के इस विघटन के बाद ऐसी भविष्यवाणीयां की जा रही हैं की जैसे मानों इनेलो का अस्तित्व खतरे में आ गया है... लेकिन इन सब के बीच इनेलो समर्थकों को उम्मीद है कि जैसे ही अजय चौटाला बाहर आयेंगे तो वो अपनी दूरदर्शिता और परिवार की एकता के मद्देनजर ऐसे कदम उठायेंगे जिससे न केवल इनेलो फिरसे एक होगी बल्कि पूरे दम-खम के साथ आने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भी बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए सत्ता में काबिज़ होगी....क्या अजय चौटाला ऐसा कर पाएंगे...? क्या अजय चौटाला पार्टी को फिरसे एक कर पाएंगे.... या फिर पार्टी दोफाड़ हो जायेगी... ये तो आने वाला वक़्त ही बतायेगा लेकिन इतना तो तय है कि पिछले कई सालों से सत्ता से बाहर रहने वाली इनेलो के लिए ऐसे समय में ये कदम आत्मघाती साबित होगा जिसका खामियाजा उन्हें आने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भुगतना पड़ेगा.....

 

 

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