Items filtered by date: Monday, 05 February 2018

आवाज़(संजीत खन्ना, झज्जर): प्रदेश के कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ के उस बयान पर पूर्व शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल ने तंज कसा है जिसमें धनखड़ ने कहा है कि गांव के स्टार देखकर ही बेटियां अपनी शादी करेंगी। भुक्कल का कहना है कि मंत्री महोदय के इस प्रकार की बयानबाजी करने की बजाय पहले प्रदेश की बेटियों के सुरक्षित रहने के लिए सरकार को बिगड़ी कानून व्यवस्था पर शिकंजा कसना होगा। झज्जर में अपने निवास स्थान पर पार्टी कार्यकर्ताओं के रूबरू होने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए भुक्कल ने कहा कि मंत्री जी केवल सुर्खियों में बने रहने के लिए इस प्रकार की बयानबाजी कर रहे है। जबकि सभी को पता है कि मंत्री महोदय ने विस चुनाव से पूर्व प्रदेश के कुंवारों की शादी दूसरे प्रदेशों में कराने की बात कही थी। उन्होंने कहा कि जनता व जन प्रतिनिधियों को यह कतई समझ में नहीं आता है कि मंत्री जी इस प्रकार की बयानबाजी क्यों करते रहते है। कभी उनका मन नाचने को करता है तो कभी वह दूसरे राज्यों की बेटियां हरियाणा में लाने की बात करते है।

वहीँ मानेसर के जमीन मामले में पूर्व सीएम चौ.भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के खिलाफ दायर की गई चार्जशीट पर बोलते हुए भुक्कल ने कहा कि अब यह जग जाहिर हो चुका है कि सरकार राजनीतिक बदले की भावना से काम कर रही है। यह सब कुछ पूर्व सीएम हुड्डा की इसी माह शुरू होने वाली रथयात्रा को रोकने के लिए हो रहा है। क्योंकि सरकार को पता है कि जब पूर्व सीएम हुड्डा की रथयात्रा निकलेगी तो उस दौरान हरियाणा की राजनीति के समीकरण ही बदल जाएगें और आमजन के शक्ति प्रदर्शन को देखकर हुड्डा विरोधियों को भी इस बात का अहसास हो जाएगा कि हरियाणा मेें अगली सरकार किसकी होगी और उसका मुखिया कौन होगा। उन्होंने कहा कि सत्तापक्ष कितने भी ओछे हथकंडे क्यों न अपना ले, पूर्व सीएम हुड्डा का रथ अब रूकने वाला नहीं है। उन्होंने इस मौके पर कृषि मंत्री धनखड़ द्वारा विकास कार्यों में जिले के लोगों के साथ भेदभाव बरतने का भी आरोप लगाया। उनका कहना था कि उन्हें विकास के लिए केवल बादली हलका ही दिखाई दे रहा है।

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आवाज़(विशाल चौधरी, कैथल): भूपेंद्र सिंह हुड्डा की चार्जशीट दायर होने पर सूबे में सियासत गर्माने लगी है. पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी तकरार हो रही है. कांग्रेस जहाँ इसे बदले कि भावना से उठाया गया कदम बता रही है वहीँ बीजेपी इसे हुड्डा से जुड़े भ्रष्टाचार से जोड़ रही है. इसी मुद्दे पर आज सूबे में राज्य मंत्री कृष्ण बेदी ने बड़ा ब्यान दिया जिसमे उन्होंने कहा कि भूपेन्द्र सिंह हुड्डा जितना भी रोये और चिल्ल्याए कानून के हाथ बहुत लम्बे है जो हुड्डा की गर्दन तक पहुच चुके है. हुड्डा ने कोलिनायिज़रों से पैसे लेकर भोले भाले किसानो की जमीन छिनकर उन्हें बर्बाद कर दिया. उन्होंने आरोप लगते हुए कहा कि हुड्डा ने सोनिया राहुल और वाड्रा का  घर भरने का काम किया है तो  उसकी सजा तो मिलेगी ही .

हुड्डा कि चार्ज-शीट को बदले की भावना की कार्यवाही बताने वाले कांग्रेसी नेताओ पर तंज कसते हुए बेदी ने कहा की जो  कांग्रेसी हुड्डा के कार्यकाल में उन्हें प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तोर पर उन्हें भ्रष्टाचारी बताते थे आज वो ही इस कार्यवाही को बदले की भावना की कार्यवाही बता रहे है . उन्होंने कहा कि यदि भारत को भ्रष्टाचार मुक्त करना हो तो घोटालेबाजों को सजा तक लेकर जाना हमारी जिम्मेवारी बनती है . वही भूपेन्द्र सिंह हुड्ड बी जे पी में शामिल करने के प्रेशर पर बोलते हुए उन्होंने कहा की भ्रष्टाचार का आरोप लगने के बाद हुड्डा की हालत ये हो गई है बीजेपी तो क्या कांग्रेस भी उन्हें रखने को तैयार नही होगी . अगर हुड्डा के नैतिकता बची है तो उन्हें त्यागपत्र दे देना चाहिये.

गौरतलब है कि कृष्ण बेदी आज कैथल  के विश्राम गृह में पत्रकारों से रूबरू होते हुए कहा की अमित शाह की रेली को आगामी  चुनाव से जोड़कर  न देखा जाये ये उनका रूटीन दोरा है . भाजपा हर साल इस तरह के कार्यक्रम परमपरागत रूप से करते है और बूथ लेवल तक के कायर्कता से मिलते है और लोगो के बीच जाकर उनकी समस्याए सुनते है . इसलिए अमित शाह अपने पहले से तय किये समय पर आ रहे है और चुनाव अपने समय पर होगे और समय चुनाव आयोग तय करेगा . हमे चुनाव की कोई जल्दी नही है आज पूरा देश मोदीमय हो और पूरा हरियाणा मनोहरमय है और हम हर वर्ग की की अपेक्षाओ को पूरा करने में लगे हुए है.

 प्रदेश की कानून व्यवस्था पर बोते हुए बेदी ने कहा पिछले कुछ समय में बलात्कार की घटनाए बढ़ी थी पर हमारे मुख्यमंत्री ने अधिकारियो को सख्त आदेश दिए हो और किसी भी अपराधी की बक्शा नही जायेगा .जिसका असर देखने को मिल रहा है . प्रेस वार्ता में बेदी काफी आक्रामक दिखे उन्होंने सीधे -और साफ शब्दों में कहा की अशोक तंवर , किरण चौधरी,  कुमारी शैलजा , चौधरी ईश्वर सिंह , राजपाल भोख्डी , नरेश सेगावाल अपने मंचो से और रणदीप सुरजेवाला अंदरखाते- भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के कार्यकाल में हुड्डा को गले तक भ्रष्टाचार में धंसा हुआ बताते था और ये लोग सीबीआई की कार्यवाही को बदले की  भावना से की गई कार्यवाही बता रहे है.

 

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आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): राजस्थान में दो लोकसभा और एक विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में सत्ताधारी भाजपा की करारी हार का असर दिखने लगा है. हार का ठीकरा सूबे कि मुझ्य्मंत्री बसुन्धरा राजे के सर फोड़ा जा रहा है. यानी बसुन्धरा के लिए मुश्किलें खड़ी होने लगीं हैं.पिछले काफ़ी सालों से राजस्थान की पार्टी इकाई के अंदर पनप रहा असंतोष अब खुलकर बाहर सामने आने लगा है. इतना ही नहीं नाराज़गी अकेले बसुन्धरा से ही नहीं है बल्कि बसुन्धरा के साथ प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी को भी हटाने की मांग हो रही है.

हार का ठीकरा बसुन्धरा और परनामी के सर फोड़ते हुए कोटा जिला ओबीसी सेल के अध्यक्ष अशोक चौधरी ने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को एक पत्र लिखा है. सूत्रों कि मानें तो उन्होंने इसमे मुख्यमंत्री पर मनमानी करने का आरोप लगाते हुए कहा है- ‘‘वसुंधरा ने पार्टी को हार के मोड़ पर लाकर खड़ा किया है. सूबे में हर वर्ग के अंदर आक्रोश पनप रहा है, कार्यकर्ता सूबे के शीर्ष नेतृत्व में बदलाव चाहते है.”  अशोक चौधरी ने पत्र में वसुंधरा राजे और अशोक परनामी का नाम लिखकर उनके इस्तीफे की मांग की है. इतना ही नहीं उन्होंने इसमें लिखा है कि अगर जल्द ही नेत्रित्व परिवर्तन न किया गया तो आने वाले विधानसभा चुनाव में इसके नतीज़े के प्रति भी बीजेपी अध्यक्ष को आगाह किया गया है. सियासी हलके में इस पत्र को काफ़ी गंभीरता से लिया जा रहा है.

यानी कहा जा सकता है कि हार कि बाद लिखे गये इस पत्र कि वजह से एक बार फिर पार्टी के अंदर बगावत की भी बू आने लगी है. गौरतलब है कि वसुंधरा सरकार के खिलाफ पहले से ही पार्टी के विधायक घनश्याम तिवाड़ी मोर्चा खोले हुए हैं. ऐसे में अब जिस तरह से संगठन से जुड़े पदाधिकारियों ने भी वसुंधरा के खिलाफ भड़ास निकालनी शुरू की है, उससे मुख्यमंत्री खेमे में हलचल है.लेकिन सूत्रों कि मानें तो ऐसा करने में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को काफ़ी दिक्कतें आएँगी और अभी वो इस हालत में नहीं हैं कि एकदम से राजस्थान में नेत्रित्व परिवर्तन किया जा सके. क्योंकि ज्यादातर विधायक अभी भी वसुंधरा के पक्ष में ही खड़े दिख रहे हैं और पार्टी इस वक़्त कोई भीऐसा कदम नहीं उठा सकती जिसकी वजह से ये हलकी चिंगारी आग का रूप धारण कर ले और आने वाले विधानसभा चुनाव में इसका खामियाज़ा भुगते.

गौरतलब है कि राजस्थान में साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में तीन सीटों में करारी हार को बड़ा झटका माना जा रहा है. क्योंकि अगर हार-जीत के वोटों के अंतर पर नजर डालें तो अजमेर लोकसभा सीट पर ये अंतर 85 हजार, अलवर लोकसभा सीट पर दो लाख वोटों से कांग्रेस प्रत्याशी ने भाजपा उम्मीदवार को हराया वहीं एकमात्र मांडलगढ़ विधानसभा सीट के उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी को 13 हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा. जबकि ये तीनों सीटें पहले भाजपा के कब्जे में थीं, मगर जनप्रतिनिधियों के निधन के बाद खाली हुईं थीं.