• अब आंध्र प्रदेश से राहुल गांधी का मोदी पर वार, बोले: गैंगरेप जैसी घटनाओं पर प्रधानमंत्री की चुप्पी स्वीकार्य नहीं.... ऐसी सरकार को शर्म आनी चाहिए.......

    आवाज़(रेखा राव, दिल्ली): राहुल जबसे कांग्रेस अध्यक्ष बने हैं तबसे वो बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर खासे हमलावर हैं..... वो देश भर में दौरे कर रहे हैं और अपने निशाने पर सीधे-सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ले रहे हैं.... ऐसा ही कुछ देखने को मिला जब राहुल गाँधी ने मंगलवार को अपने आंध्र प्रदेश के दौरे के दौरान हरियाणा के रेवाड़ी में हुए गैंगरेप की घटना पर प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा..... उन्होंने कहा की देश में ऐसी घटना हुई और प्रधानमंत्री चुप्पी साधे हुए हैं......ऐसी सरकार को शर्म आनी चाहिए.....  राहुल ने कहा कि "भारतियों को शर्म से सर झुका लेना चाहिए, क्योंकि फिर एक बेटी के साथ गैंगरेप की घटना हुई है..... प्रधानमंत्री जी आपकी चुप्पी अस्वीकार्य है.....उस सरकार पर शर्म आनी चाहिए जिसके शासन में महिलाएं असुरक्षित हैं..और बलात्कारी खुलेआम घूम रहे हैं....." वहीँ उन्होंने आंध्र प्रदेश में एक सभा को सम्बोधित करते हुए लिंगभेद पर भी बोला.... राहुल ने कहा कि पुरुषों की ऐसी मानसिकता बन गई है कि वो महिलाओं को अपने बराबर नहीं समझते हैं....हमें इसे सही करना होगा और इसके लिए समाजिक बदलाव लाना होगा, तब जाकर पुरुष महिलाओं को बराबर का दर्ज़ा देंगे... इसके लिए जरुरी है कि पुलिस और पॉलिटिक्स में महिलाओं की भागीदारी बढ़े....संसद में इसके लिए महिला रिजर्वेशन बिल लाया जाना चाहिए... लेकिन प्रधानमंत्री इसपर चुप्पी साधे हुए हैं....हमने उनसे कहा कि वो महिला आरक्षण बिल पास करें , कांग्रेस उन्हें पूरा समर्थन देगी... लेकिन उन्होंने किसी तरह की कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.....   Read More
  • उत्तर प्रदेश: खाने के डिब्बों पर टूट पड़े कांग्रेसी, राज बब्बर समझाते ही रह गए ..... पार्टी की हुई खूब फजीयत......कार्यकर्ताओं की इस हरकत से हाई कमान नाराज़......

    आवाज़(रेखा राव, दिल्ली): उत्तर प्रदेश में कांग्रेस अपना जनाधार बढ़ाने के लिए कई प्रयास कर रही है लेकिन हर बार दांव उल्टा ही पड़ जाता है.......पार्टी कार्यकर्ताओं को रिझाने की जितनी कोशिश करती है कार्यकर्ता कुछ ऐसा कर देते हैं कि पूरे देश में कांग्रेस की फजीहत हो जाती है..... पहले जब राहुल ने किसानों से सम्वाद साधने के लिए खाट पर चर्चा शुरू की तो कांग्रेस कार्यकर्ता मीटिंग के बाद खाट अपने घर उठा ले गये जिससे न केवल कांग्रेस का ये प्लान फेल हो गया बल्कि कार्यकर्ताओं की इस उद्दंडता ने देश भर में कांग्रेस को हंसी का पात्र बना दिया.... ऐसा ही कुछ इस बार भी देखने को मिला जब सोमवार को उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में कांग्रेस का कार्यकर्ता सम्मेलन हंगामे की भेंट चढ़ गया....अभी कार्यक्रम चल ही रहा था कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच खाने के डिब्बों को लेकर छीना-छपटी मच गई...स्थानीय मीडिया की खबरों को मानें तो कांग्रेस नेता राज बब्बर मंच से कार्यकर्ताओं को समझाते ही रह गये लेकिन किसी ने उनकी एक न सुनी....ऐसा लगा मानों चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई हो... जिसे देखकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नवी आज़ाद काफी नाराज़ हुए और मंच छोड़कर चले गये.... दरअसल कांग्रेस ने मुरादाबाद के पंचायत भवन में कार्यकर्ता सम्मेलन रखा था, जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नवी आजाद,जतिन प्रसाद, प्रमोद तिवारी और राज बब्बर जैसी कई हस्तियां शिरकत कर रही थीं....लेकिन जिस तरह से कार्यक्रम के बीच में ही कार्यकर्ताओं ने खाने के डिब्बों को लेकर हंगामा किया, छीना-छपटी की उसने कांग्रेस की हालत ब्यान कर दी.....सोशल मीडिया पर इस मीटिंग का एक विडियो भी वायरल हो रहा है जिसमे कांग्रेस नेता राज बब्बर कार्यकर्ताओं को समझाने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन उनकी कोई नहीं सुन रहा... देश भर में इस विडियो ने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के अनुशासन की पोल खोल कर रख दी है... और पार्टी को एक बार फिर से हंसी का पात्र बना दिया है..... बहरहाल कांग्रेस की खुद को उत्तर प्रदेश में फिर से खड़ा करने की क़वायद जारी है... टीम राहुल गांधी इसके लिए पूरी मेहनत भी कर रही है.... अब वो इसमें कितना कामयाब हो पाते हैं ये तो वक़्त ही बतायेगा लेकिन इस तरह की घटनाएं न केवल पार्टी की छवि को नुक्सान पहुंचाती हैं बल्कि पार्टी को शर्मसार भी करती हैं... सूत्रों की मानें तो ये हरकत कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के समक्ष हुई  जिससे पार्टी हाई कमान बहुत नाराज़ है..... Read More
  • RSS संवाद: नेताओं-अभिनेताओं का जमावड़ा शुरू, भागवत बोले: तिरंगे का करते हैं सम्मान पर भगवा ध्वज हमारा गुरु.....

    आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (RSS) पर कांग्रेस पूरी तरह हमलावर है..... कई आरोप पार्टी द्वारा आर एस एस पर लगाए जा रहे हैं..... महात्मा गाँधी की हत्या से लेकर देश को साम्प्रदायिकता के मुद्दे में उलझाने से लेकर देश को बांटने तक के इल्ज़ाम कांग्रेस आर एस एस पर लगा रही है.... लेकिन इन सब के बीच आर एस एस बिना किसी चीज़ की परवाह किये अपने एजेंडा को अमल में लाने के लिए प्रयासरत है और अपने कार्यक्रमों के ज़रिए देश ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में सुर्खियाँ बटोर रहा है.....इसी सब के बीच आज आर एस एस का तीन दिवसीय मंथन शिविर दिल्ली में शुरू हो गया है. जिसमें भाग लेने के लिए देशभर से गणमान्य लोग पहुंचे हैं, जिसमे नेता से लेकर अभिनेता तक शामिल हैं........नेताओं की बात करें तो बीजेपी नेता पीपी चौधरी, राम माधव, नरेंद्र जाधव, अमर सिंह और ए सूर्यप्रकाश पहुंच गए हैं. इनके अलावा बॉलीवुड हस्तियों में एक्टर नवाजुद्दीन सिद्दीकी, फिल्मकार मधुर भंडारकर, अनु मलिक, अन्नू कपूर और मनीषा कोइराला भी कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे हैं.  कार्यक्रम की ख़ास बात ये है कि यहां राष्ट्रीय महत्व के कई मुद्दों पर संघ प्रमुख मोहन भागवत अपने विचार रखेंगे. वहीँ कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, संघ के कार्यकर्ता बिना किसी प्रचार के अपना काम करते हैं. हालांकि उन्हें भी अपने इन कामों के लिए अलग-अलग माध्यमों से पब्लिसिटी मिलती है, जिसकी कभी आलोचना भी होती है...... भागवत ने कहा, मुझे जैसी जानकारी है, उसी आधार पर अपना नजरिया पेश करने आया हूं. अब आप पर निर्भर करता है कि कैसे इसे देखते हैं. संघ जो कुछ भी करता है, वह खास होता है और तुलना से परे भी क्योंकि संघ की अपनी एक विशिष्ट पहचान है और यह लोगों के बीच ही प्रसिद्ध हुआ है.  भागवत ने आगे कहा, संपूर्ण हिंदू समाज को संगठित करने के लिए संघ की स्थापना हुई. सबसे बड़ी समस्या यहां का हिंदू है, अपने देश के पतन का आरंभ हमारे पतन से हुआ है. हिंदुस्तान हिंदू राष्ट्र है इसकी घोषणा हेडगेवार ने की. भागवत ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने देश के स्वतंत्रता संग्राम में बड़ा रोल निभाया और भारत को कई महान हस्तियां दीं. वहीँ कांग्रेस के आर एस एस पर तिरंगे का सम्मान नहीं करने के इलज़ाम का जवाब देते हुए भागवत ने कहा, संघ हमेशा तिरंगे का सम्मान करता है. स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी हर निशानियों से प्रत्येक स्वयंसेवक दिल से जुड़ा है लेकिन भगवा ध्वज को हम अपना गुरु मानते हैं. हर साल इसी ध्वज के सामने हमलोग गुरु दक्षिणा कार्यक्रम आयोजित करते हैं. हम इस देश में संघ के दबदबे की मंशा नहीं रखते. भागवत ने यह भी कहा कि वे लोगों को जोड़ना चाहते हैं, उनपर कुछ थोपना नहीं...संघ के विचारों को वे सबके साथ बांटना चाहते हैं.  गौरतलब है कि संघ के इस तीन दिवसीय इस कार्यक्रम के केंद्र में हिंदुत्व होगा. कार्यक्रम की विशिष्टता की बात करें तो तीनों दिन आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा राष्ट्रीय महत्व के विभिन्न समसामयिक विषयों पर संघ का विचार प्रस्तुत किया जाना है. कार्यक्रम में करीब 700-750 मेहमान आने की संभावना है. इनमें से 90 फीसदी लोग संघ से नहीं हैं. मोहन भागवत शुरुआती दो दिन में कार्यक्रम को संबोधित करेंगे, इसके अलावा आखिरी दिन वह जनता के सवालों का जवाब देंगे. मोहन भागवत इस दौरान करीब 200 से अधिक सवालों का जवाब देंगे. इस कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, दिग्विजय सिंह और जयराम रमेश को निमंत्रण भेजे जाने की भी खबर थी. हालांकि, कांग्रेस की तरफ से राहुल गांधी को ऐसा कोई निमंत्रण मिलने की बात से इनकार किया गया है. वहीं, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव आजतक के कार्यक्रम में ही वहां जाने से इनकार कर चुके हैं. जबकि कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़ने ने भी साफतौर पर राहुल गांधी से आरएसएस कार्यक्रम में न जाने का आह्वान किया है. वहीं, सीताराम येचुरी और दिग्विजय सिंह जैसे दिग्गज नेताओं को भी इस कार्यक्रम के लिए निमंत्रण भेजे जाने की चर्चा थी, लेकिन उनकी तरफ से इसका इनकार किया गया है. यानी संघ के कार्यक्रम में विपक्षी दलों के नेताओं का पहुंचना नामुमकिन नजर आ रहा है. बहरहाल इतना तो तय है कि संघ बिना किसी की परवाह किये हुए अपने एजेंडा को ज़मीन पर उतारने की कोशिश कर रहा है.... जिस तरह से देश की कई नामचीन हस्तियाँ संघ के कार्यक्रमों में आ रही हैं वो भी ये दर्शाती हैं कि पिछले कुछ वर्षों में संघ ने भी अपना चाल, चरित्र और चेहरा भी बदला है.... कभी कट्टर हिन्दुओं और ब्राह्मणवाद के इलज़ाम से ग्रसित संघ आज समाज के हर वर्ग और धर्म में अपनी पैठ बनाने के कामयाब हो रहा है.... अब आगे क्या होता है ये तो वक़्त ही बतायेगा लेकिन इतना तो तय है कि संघ की दिनोंदिन बढ़ती समाजिक और राजनीतिक सक्रियता देश के कई राजनीतिक और गैर राजनीतिक संगठनों के मन में बेचैनी पैदा कर रही है....वहीँ संघ चुपचाप अपना काम करता जा रहा है.....   Read More
  • SC/ST act का विरोध कर रहे कथावाचक और आध्यात्मिक गुरु देवकीनन्दन ठाकुर गिरफ्तार, फिर रिहा...... समर्थकों में भारी रोष......

    आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): जैसे जैसे लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं वैसे वैसे बीजेपी की मुश्किलें भी बढती हुई नजर आ रही हैं... SC/ST act के खिलाफ देश भर के सवर्णों में बीजेपी का विरोध बढ़ता ही जा रहा है..... मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार जैसे कई प्रदेशों में बीजेपी को विरोध का सामना करना पड़ रहा है.....कहीं बीजेपी के सांसदों और विधायकों मंत्रियों को चूड़ियाँ भेंट की जा रही हैं तो कहीं उन्हें काले झंडे दिखाए जा रहे हैं... इतना ही नहीं कई जगह से तो बीजेपी के मंत्रियों को कार्यक्रम छोड़कर भागना पड़ा.... लगता है की अब ये SC/ST act बीजेपी के लिए मुसीबत बन गया है जो न निगलते बन रहा है न उगलते... हालांकि बीजेपी ने ये साफ़ कर दिया है कि वो इस एक्ट को न तो वापिस लेंगे और नाही इसमें किसी तरह का बदलाव करेंगे लेकिन जिस तरह से इस एक्ट के विरोध में स्वर्ण समाज बीजेपी के खिलाफ हो रहा है वो निश्चित तौर पर बीजेपी के लिए चिंता का विषय है क्योंकि आजतक ऐसा माना जाता रहा है की स्वर्ण समाज बीजेपी को ही बोत करता आया है.... मतलब साफ़ है की आगामी विधानसभा चुनावों और लोकसभा चुनाव में बीजेपी को इसकी  भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है...... इसी कड़ी में आज बड़ी हलचल ये हुई कि उत्तर प्रदेश सरकार ने SC/ST एक्ट का विरोध कर रहे कथावाचक और आध्यात्मिक गुरु देवकीनंदन ठाकुर को आगरा में गिरफ्तार कर लिया, जिसके बाद देश भर में उनके समर्थकों में सरकार के खिलाफ रोष और बढ़ गया.......देवकीनंदन आगरा में विरोध प्रदर्शन की जिद कर रहे थे. जबकि वहां जिला प्रशासन ने धारा 144 लगा रखी है. गौरतलब है कि देवकीनंदन ठाकुर एससी एसटी एक्ट संशोधन के विरोध को लेकर आजकल काफी चर्चा में हैं. इसी बात का विरोध करने के लिए वो आगरा में प्रदर्शन करना चाहते थे. लेकिन पुलिस ने धारा 144 का हवाला देकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया. हालांकि बाद में उन्हें निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया. देवकीनंदन ठाकुर एससी एसटी एक्ट का विरोध करने मंगलवार को आगरा आए थे. लेकिन प्रशासन ने उन्हें अनुमति नहीं दी. अनुमति न मिलने पर उन्होंने कमला नगर स्थित एक होटल में दोपहर 2 बजे प्रेस कांफ्रोस की. प्रेस कांफ्रेंस के 2 घंटे बाद यानी 4 बजे उनको शांति भंग के आरोप में धारा 151 में गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस उनको गिरफ्तार कर पुलिस लाइन ले गई जहां से उनको निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया. रिहाई के बाद ठाकुर देवकीनन्दन मथुरा के लिये रवाना हो गये. प्रेस कांफ्रेंस में देवकीनंदन ने बताया कि उनको बदनाम करने की कोशिश की जा रही है. सोशल मीडिया के माध्यम से उनको जान से मारने की भी धमकी दी गई है. ये सब एससी एसटी एक्ट कानून का विरोध करने पर किया जा रहा है. सरकार द्वारा की गई इस गिरफ्तारी का कई बुद्धिजीवियों ने भी विरोध किया है.....मशहूर कवि कुमार विश्वास ने इस गिरफ्तारी को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार को निशाने पर लेते हुए ट्वीट किया... उन्होंने कहा कि "जातिगत वोटों की बेशर्म लालसा में पहले तो इस सरकार ने संसद में एससी-एसटी एक्ट का बिल लाकर बाबा साहेब द्वारा प्रदत और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रतिष्ठित समान नागरिक अधिकारों का अपहरण किया....अब उसका विरोध कर रहे कथावाचक को गिरफ्तार करके सरकार ने ये सिद्ध कर दिया कि उसके अहंकार ने विवेक का अपहरण कर लिया है......... गौरतलब है कि देवकीनंदन एक कथावाचक और आध्यात्मिक गुरु हैं, जिन्होंने SC-ST एक्ट के खिलाफ मुहिम चलाने के लिए 'अखंड इंडिया मिशन' नाम का एक दल भी बनाया गया है. इस दल के वो राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं....एससी-एसटी एक्ट में किए गए बदलाव को समाज बांटने वाला बताते हुए भागवताचार्य देवकीनंदन ठाकुर ने कहा कि केंद्र सरकार अगले दो महीने में इस एक्ट को सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार रूप में बदल दे. यदि ऐसा नहीं हुआ तो हम सब मिलकर देश को जातिगत राजनीति वाले दलों से स्थाई समाधान देंगे. कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर हाल ही में अपने एक विवादित बयान को लेकर खूब चर्चा में रहे. उन्होंने सरकार को चेतावनी भरे लहजे में कहा था- 'दो महीने का समय हमने लिया है, अगर हमें हल मिल गया तो हम कुछ नहीं करेंगे. अगर नहीं मिला तो वो करेंगे जो भारत के इतिहास में कभी हुआ ही नहीं.' देवकीनंदन ठाकुर का जन्म 12 सितंबर 1978 को उत्तर प्रदेश के मथुरा में हुआ था. वह श्रीकृष्ण जन्मभूमि मथुरा के ओहावा गांव के एक ब्राह्मण परिवार से हैं. उनकी मां श्रीमद्भागवतगीता महापुराण में काफी विश्वास रखती थीं. उनके अलावा उनके 4 भाई और दो बहनें भी हैं. 6 साल की उम्र में वह घर छोड़कर वृंदावन पहुंचे और ब्रज के रासलीला संस्थान में हिस्सा लिया. यहां उन्होंने भगवान कृष्ण और भगवान राम की भूमिकाएं निभाईं. श्रीकृष्ण (ठाकुरजी) की भूमिका निभाने की वजह से घर में उन्हें 'ठाकुरजी' कहा जाने लगा. कहा जाता है कि 13 साल की उम्र में उन्होंने श्रीमद्भागवतपुराण कंठस्थ कर लिया. उन्होंने निंबार्क संप्रदाय के अनुयायी के रूप में गुरु-शिष्य की परंपरा के तौर पर दीक्षा ली. 18 साल की उम्र में दिल्ली के शाहदरा में श्रीराममंदिर में श्रीमदभागवत महापुराण के उपदेश लोगों को दिए. इसके बाद उन्होंने कई जगहों पर श्रीकृष्ण और राम कथा का वाचन किया और उनके फॉलोअर्स की संख्या बढ़ने लगी. बता दें कि ट्विटर पर उनके 3 लाख 27 हजार फॉलोअर्स जबकि फेसबुक पर 25 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं. Read More
  • SC/ST एक्ट: लखनऊ हाईकोर्ट बेंच का बड़ा फैसला- SC/ST एक्ट केस में सीधे गिरफ्तारी न की जाए.....

    आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): एक तरफ देश में एस/एसटी एक्ट के पक्ष और विरोध में बड़ी बहस चल रही है, राजनीतिक पार्टियाँ इसे किसी तरह अपने पक्ष में भुनाने की कोशिश कर रही हैं वहीँ दूसरी तरफ अनुसूचित जाति-जनजाति (SC/ST) अधिनियम मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने बड़ा आदेश दिया है. SC/ST एक्ट या फिर अन्य कानून जिसमें सात साल सजा या उससे कम है, उस के तहत आरोपितों की रूटीन गिरफ्तारी पर नाराजगी जाहिर की है. कोर्ट ने कहा कि आरपीसी के प्रावधानों का पालन किए बगैर एक दलित महिला और उसकी बेटी पर हमले के आरोपी चार लोगों को गिरफ्तार नहीं कर सकती है. गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के 2014 के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि 7 साल से कम सजा के मामलों में आरोपी को गिरफ्तारी से पहले नोटिस देकर पूछताछ के लिए बुलाया जाए. आरोपित अगर नोटिस की शर्तों का पालन करता है तो उसे विवेचना के दौरान गिरफ्तार नहीं किया जाएगा. कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में सीआरपीसी की धारा 41 और 41ए का पालन करने का आदेश दिया है. सीधे गिरफ्तारी तब ही संभव है जब यह आवश्यक हो. दरअसल हाईकोर्ट के जस्टिस अजय लांबा और जस्टिस संजय हरकौली की बेंच ने ये बातें SC/ST ऐक्ट  में केंद्र सरकार के अध्यादेश के बाद 19 अगस्त को दर्ज एक एफआईआर को रद करने की मांग वाली याचिका की सुनवाई के दौरान कही. ये याचिका गोंडा के कांडरे थाने में राजेश मिश्रा के खिलाफ मारपीट, SC/ST एक्ट के मामले में हुई गिरफ्तार को रद्द करने के लिए दायर की गई थी. हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में गिरफ्तारी से पहले अरनेश कुमार बनाम बिहार राज्य के केस में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए 2014 के फैसले का पालन किया जाए. इसी के साथ कोर्ट ने याचिका को निस्तारित कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने अनरेश कुमार मामले में फैसला दिया था कि यदि किसी के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में अपराध की अधिकतम सजा सात साल तक की है, तो ऐसे मामले में सीआरपीसी 41 और 41ए के प्रावधानों का पालन किया जाएगा. जांचकर्ता को पहले सुनिश्चित करना होगा कि गिरफ्तारी अपरिहार्य है, अन्यथा न्यायिक मजिस्ट्रेट गिरफ्तार व्यक्ति की न्यायिक रिमांड नहीं लेगा.   इस मामले में दायर हुई थी याचिका अनुसूचित जाति की महिला शिवराजी देवी ने 19 अगस्त 2018 को गोंडा के कांडरे थाने में राजेश मिश्रा व तीन अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवाई. महिला का आरोप है कि 18 अगस्त 2018 को रात 11 बजे सुधाकर, राजेश, रमाकांत  और श्रीकांत रंजिशन उसके घर में घुस आए. उसे और उसकी बेटी को जातिसूचक गालियां देने लगे. विरोध करने पर इन सभी लोगों ने लात-घूंसों, लाठी-डंडे से उन्हें मारा, जिससे काफी चोटें आईं. जबकि आरोपी पक्ष का कहना है कि राजनीतिक रंजिश के तहत उन्हें फंसाया जा रहा है. क्या था 2014 का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने 2 जुलाई 2014 को अनरेश बनाम बिहार केस मामले में फैसला सुनाय था. बिना ठोस वजह के आरोपी की गिरफ्तारी महज इसलिए कर ली जाए. क्योंकि कानून के तहत विवेचक को गिरफ्तारी का अधिकार रहता है. सुप्रीम कोर्ट ने ऐसी प्रथा पर गंभीर आपत्ति जताई थी. कोर्ट ने सीआरपीसी-41 में संशोधन का हवाला देते हुए कहा था कि जिन मामलों में सजा सात साल या उससे कम है, उनमें गिरफ्तारी से पहले विवेचक बताना होगा गिरफ्तारी क्यों जरूरी है? कोर्ट ने कहा था कि अभियुक्त पूछताछ के लिए आता है और नोटिस की शर्तों का पालन करता है तो जांच के दौरान गिरफ्तार नहीं किया जाएगा.(सौजन्य:आजतक डॉट इन)   Read More
  • हिमाचल प्रदेश: आखिर कौन होगा काँगड़ा-चंबा लोकसभा सीट से शांता कुमार का उत्तराधिकारी....टिकेट के दावेदारों में रणबीर सिंह "निक्का" का नाम चर्चा में आने से मची खलबली..........

    आवाज़(रेखा राव, दिल्ली): लोकसभा चुनाव 2019 का आगाज़ हो चुका है और तमाम सियासी पार्टियों ने इसके लिए कमर कस ली है.... कांग्रेस जहाँ बीजेपी पर हमलावर है और महागठबंधन की क़वायद में जुटी हुई है वहीं बीजेपी भी इसके लिए पूरी तरह तैयार है....ऐसे में अगर बात हिमाचल प्रदेश की करें तो यहाँ भी दोनों पार्टियों के बीच जबरदस्त टक्कर देखने को मिल सकती है.... हिमाचल प्रदेश की राजनीति में काँगड़ा चंबा लोकसभा सीट हमेशा से ही चर्चा का विषय रही है जहाँ से बीजेपी के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार मौजूदा सांसद हैं..... लेकिन शांता कुमार ने कुछ वक़्त पहले ये ऐलान कर दिया था कि अब वो चुनाव नहीं लेंगे..... ऐसे में अब इस लोकसभा सीट के लिए बीजेपी के दावेदारों  लिस्ट बढती हुई नजर आ रही है..... सूत्रों की मानें तो यहाँ एक बार फिरसे मुकाबला दिलचस्प होने जा रहा है क्योंकि कांग्रेस की तरफ से ब्राह्मण चेहरे को टिकेट दिया जा सकता है जिसमे व् परिवहन मंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता जी.एस. बाली और सुधीर शर्मा का नाम प्रमुखता के साथ लिया जा रहा है..... ऐसे में बीजेपी के लिए यहाँ से सशक्त उम्मीदवार को टिकेट देना मजबूरी हो गया है ... क्योंकि अगर जी एस बाली या सुधीर शर्मा मैदान में आते हैं तो निश्चित तौर पर बीजेपी के लिए चुनौतीयां काफी बढ़ जायेंगी....... तमाम परिस्थितियों को देखते हुए बीजेपी किसी ऐसे नाम पर विचार कर रही है जिसकी संगठन में तो पकड़ हो ही साथ ही जनता के बीच भी साफ़ छवि हो....जो मोदी के अनुसार भविष्य की राजनीती के लिए भी उपयुक्त हो और आने वाले 15-20 साल तक बीजेपी का इस संसदीय क्षेत्र से प्रतिनिधित्व कर सके..... ऐसे में इंदु गोस्वामी और पवन राणा के नाम तो इस सीट की दावेदारी में आगे चल ही रहे हैं साथ ही एक और नाम चर्चा में आया है, जिससे टिकेट के कई दावेदारों को झटका लग्न तय है.....ये नाम बीजेपी के नूरपुर जिला के महामंत्री ठाकुर रणबीर सिंह निक्का का है जिनकी साफ़ छवि और पार्टी के प्रति वफादारी किसी से छुपी हुई नहीं है......  सूत्रों की मानें तो वो भी बीजेपी की तरफ से सशक्त उम्मीदवार हो सकते हैं क्योंकि एक तो वो शांता कुमार और धूमल दोनों के प्रिय हैं और जिला काँगड़ा के साथ साथ चंबा में भी गहरी पकड़ रखते हैं..... जो केवल राजपूतों में ही नहीं बल्कि आम जन-मानस में भी खासे लोकप्रिय हैं..... उनकी दावेदारी को एक बात जो और मजबूत बनाती है वो ये है कि बीजेपी ने नूरपुर से उनका विधानसभा टिकेट काटा था तब उनसे ये वादा किया था कि सही समय आने पर उन्हें पार्टी उनके इस बलिदान का प्रतिफल देगी.. ऐसे में ये अटकलें लगनी शुरू हो चुकी हैं कि रणबीर सिंह निक्का काँगड़ा-चंबा लोकसभा सीट से बीजेपी के उम्मीदवार हो सकते हैं..... ऐसे में ऐसी अटकलें लग्न शुरू हो गई हैं कि बीजेपी इस सीट से निक्का को टिकेट देकर शांता कुमार और धूमल दोनों खेमों को भी संतुष्ट करना चाहेगी क्योंकि निक्का की दोनों गुटों में अच्छी पकड़ है और उनके नाम पर शायद ही किसी भी गुट को कोई आपत्ति हो....वहीँ कांग्रेस के खिलाफ भी बीजेपी को चक्रव्यूह रचने में आसानी होगी..... निक्का ठाकुर समुदाय से आते हैं जिसका लाभ उन्हें निश्चित तौर पर मिलेगा क्योंकि हिमाचल में ठाकुर सबसे बड़ा समुदाय है और इस तबके का रुझान हमेशा बीजेपी की तरफ रहा है.... लेकिन जब से एस सी/एसटी एक्ट पर बीजेपी का विरोध शुरू हुआ है तबसे बीजेपी के लिए स्वर्ण लोगों को अपने साथ जोड़े रखना एक बड़ी चुनौती हो गया है... ऐसे में निक्का बीजेपी के काँगड़ा-चंबा लिक्स्भा सीट से बेहतर उम्मीदवार हो सकते हैं.... जो सबको साथ लेकर चलने में सक्षम हैं....जो बिना किसी के विरोध के आगे बढ़ सकते हैं..... अब होता क्या है ये तो आने वाला वक़्त ही बतायेगा लेकिन इतना तो तय है कि निक्का का नाम आगे आने से टिकेट के बहुत सारे दावेदारों को झटका लगेगा ही......   Read More
  • हिमाचल प्रदेश: लोकसभा चुनावों की सुगबुगाहट के बीच कांग्रेस ने भी की तैयारी शुरू, जी.एस. बाली या फिर सुधीर शर्मा लड़ सकते हैं काँगड़ा-चंबा लोकसभा सीट से चुनाव....!

    आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनजर हिमाचल कांग्रेस में भी हलचल शुरू हो गयी है. दावेदारों की सूची दिनोंदिन लम्बी होती जा रही है. जिनमें दिग्गज कांग्रेसी नेता व पूर्व मंत्री जी.एस.बाली, वीरभद्र सिंह के ख़ास पूर्व मंत्री सुधीर शर्मा, काँगड़ा से पूर्व कांग्रेसी सांसद चौधरी चन्द्र कुमार, हर्ष महाजन जैसे कई लोगों के नाम शामिल हैं. लेकिन सूत्रों की मानें तो इन नामों में जी.एस बाली और सुधीर शर्मा का नाम सबसे आगे चल रहा है. यानी काँगड़ा-चंबा लोकसभा सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार या तो जी.एस.बाली हो सकते हैं या फिर सुधीर शर्मा. दोनों ही नेता आजकल अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों के साथ-साथ पार्टी के अंदर-बाहर भी काफी सक्रिय हैं जिससे इन संभावनाओं को और बल मिला है. राजनितिक पंडितों की मानें इन दोनों नामों के आगे चलने के पीछे कई वजहें भी हैं. सबसे पहले अगर जी.एस. बाली के नाम पर नजर डाली जाए तो वो निसंदेह काँगड़ा के सबसे दिग्गज कांग्रेसी नेता हैं. उनका जनाधार केवल अपने विधानसभा क्षेत्र में ही नहीं बल्कि दूसरे विधानसभा क्षेत्रों में भी है. इतना ही नहीं विधानसभा चुनावों से पहले ये कयास भी लगाये जा रहे थे कि वीरभद्र सिंह के बाद बाली एक ऐसे नेता हैं जो कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हो सकते हैं. लेकिन चुनाव परिणाम बिलकुल विपरीत आये और बलि थोड़े से वोटों से अपना चुनाव हार गये. लेकिन आजकल फिर से पार्टी के अंदर और बाहर बाली की बढ़ती सक्रियता ने इस सम्भावना को और बढ़ा दिया है कि वो आगामी लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की तरफ से सम्भावित उम्मीदवार हो सकते हैं. दूसरी बात जो बाली की उम्मीदवारी को ज्यादा बल देती है वो ये है कि पार्टी हाई-कमान में भी उनकी अच्छी खासी पकड़ है. दिल्ली दरबार से उनके नजदीकी रिश्ते किसी से छुपे हुए नहीं हैं. ऐसा माना जाता रहा है कि हिमाचल में बनने वाली कांग्रेस सरकारों में मुख्यमंत्री की इच्छा न होते हुए भी उन्हें मंत्री पद देना पड़ता था. और मंत्री रहते हुए उन्होंने कई ऐसे फैसले लिए जिसके कारण उनका और मुख्यमंत्री के बीच 36 का आंकड़ा रहा, लेकिन बाली ने कभी इसकी परवाह नहीं की और अपने तरीके से अपने काम को आगे बढ़ाया फिर चाहे इसके लिए उन्हें किसी के भी विरोध का सामना करना पड़ा हो. तीसरा कारण जो उनकी उम्मीदवारी को और पुख्ता कर रहा है वो वीरभद्र सिंह की हिमाचल की राजनीती में दिनोंदिन ढीली होती पकड़ है. एक समय था जब हिमाचल में वीरभद्र सिंह की तूती बोलती थी. लेकिन पिछले कुछ समय से वीरभद्र को जिस तरह से पार्टी हाई-कमान दरकिनार करके सुखविंदर सिंह सुक्खू को तरजीह दी उससे ऐसा लगा मानों वीरभद्र का राजनितिक करियर ढलान पर है. वीरभद्र के तमाम विरोध के बावजूद सुक्खू अपने पद पर बने रहे जिसने इस बात की तरफ इशारा कर दिया कि पार्टी हाई-कमान की नजरों में अब वीरभद्र की उतनी एहमियत नहीं रही जितनी की पहले कभी हुआ करती थी. अब ऐसा माना जा रहा है कि लोकसभा चुनावों में सुक्खू भी बाली के नाम को आगे बढ़ा सकते हैं क्योंकि इसके उन्हें दो फायदे होंगे. एक तो वीरभद्र के समर्थित उम्मीदवार को वो पछाड़ सकेंगे साथ ही आने वाले समय में वो अपनी मुख्यमंत्री पद की दावेदारी के लिए बाली से समर्थन की उम्मीद भी कर सकते हैं. वहीँ सुधीर शर्मा के नाम पर नजर डालें तो उनकी उम्मीद्वारी को सबसे प्रबल बनाने वाली वजह वीरभद्र सिंह का ख़ास होना है. वो वीरभद्र सिंह के चहेते हैं और ऐसा भी कहा जाता रहा है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार का चेहरा भले ही वीरभद्र सिंह थे लेकिन परदे के पीछे सुधीर शर्मा की काफी चलती थी. यानी अगर एक बार फिर से वीरभद्र सिंह की बात टिकेट आवंटन में सुनी गई तो सुधीर शर्मा का काँगड़ा-चंबा लोकसभा सीट के चुनाव लड़ना तय है. दूसरा कारण जो सुधीर शर्मा की उम्मीदवारी को और पुख्ता करता है वो ये है कि काँगड़ा के अंदर वो भी बाली की तरह एक व्यापक जनाधार वाले ब्राह्मण नेता हैं. उन्होंने पहले अपनी पैत्रिक जगह बैजनाथ से चुनाव जीता और फिर धर्मशाला का रुख किया जहाँ से भी उन्हें जीत हासिल हुई. लेकिन इस बार के चुनाव में उन्हें धर्मशाला से हार का सामना करना पडा. इसके अलावा तीसरा कारण जो उन्हें प्रबल उम्मीदवार बनाता है वो ये है कि उन्हें जिला काँगड़ा के कई कांग्रेसी नेताओं का साथ मिल सकता है जो उनके नाम का समर्थन करेंगे. बहरहाल मौजूदा हालात पर नजर डालें तो इतना तो तय है कि कांग्रेस की तरफ से इस बार काँगड़ा-चंबा लोकसभा सीट पर एक ब्राह्मण उम्मीदवार होगा. लेकिन राजनीति में हर रोज़ नई संभावना बनती और बिगडती है. अभी के हालात तो यही ब्यान कर रहे हैं कि बाली या सुधीर में से किसी एक को कांग्रेस लोकसभा चुनाव के लिए अपना उम्मीदवार बना सकती है, और इन दोनों की पार्टी के अंदर बढ़ती सक्रियता भी यही गवाही दे रही है. अब आगे होगा क्या ये तो आने वाला वक़्त ही बतायेगा लेकिन जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं वैसे-वैसे हिमाचल कांग्रेस के अंदर भी राजनीति गरमाती जा रही है. Read More
  • प्रधानमंत्री पद की दावेदारी से पीछे हटे राहुल गांधी, कांग्रेस अब मायावती या ममता बैनर्जी पर खेल सकती है बड़ा दांव......!

    आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली):  देश भर में लोकसभा चुनावों का आगाज़ हो चूका है. तमाम पार्टियों ने इसके लिए कमर कस ली है. फिर चाहे वो सत्तारूढ़ बीजेपी हो या कांग्रेस सबने अपने हिसाब से राजनितिक समीकरण बैठने शुरू कर दिए हैं. लेकिन इन सब के बीच एक बाद खबर ये आ रही है कि कल तक जो कांग्रेस और उसके अध्यक्ष राहुल गांधी खुद को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बता रहे थे उन्होंने अब परिस्थियों को भापते हुए प्रधानमंत्री पद की अपनी उम्मीदवारी से हाथ पीछे खींच लिए हैं. राजनितिक पंडितों की मानें तो ऐसा कदम कांग्रेस ने बहुत घन विचार-विमर्श के बाद उठाया है. दरअसल पिछले काफी समय से कांग्रेस प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ महागठबंधन के लिए प्रयासरत है लेकिन उसमे उसे अबतक कोई बड़ी कामयाबी नहीं मिली है. कांग्रेस ने इसके लिए कई क्षेत्रीय क्षत्रपों से भी सम्पर्क साधा लेकिन बार सिरे चढ़ते हुए नहीं दिख रही है. क्योंकि ज्यादातर क्षेत्रीय दलों को राहुल गांधी प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में मंजूर नहीं हैं. इसलिए कांग्रेस अब मजबूरी में राहुल गांधी की प्रधानमंत्री पद की  उम्मीदवारी से कदम पीछे खींच रही है. सूत्रों की मानें तो कांग्रेस ने राहुल गांधी के नेत्रित्व में सब दलों को एकजुट करने का अभियान तो चलाया लेकिन जेडीएस को छोड़कर कोई भी दूसरा दल राहुल गांधी के नेत्रित्व में चुनाव लड़ने के लिए तैयार नहीं हुआ. ऐसे में कांग्रेस ने अब राहुल की उम्मीद्वारी को पीछे छोड़ देश भर में मोदी के खिलाफ महागठबंधन बनाने की कवायद शुरू की है. जनसत्ता की मानें तो राहुल गांधी अब सब क्षेत्रीय पार्टियों को साथ लेकर चलना चाह रहे हैं और इसके लिए कई प्रदेशों में कांग्रेस क्षेत्रीय दलों को ज्यादा सीटें देकर खुद कम सीटों पर भी लड़ सकती है. मुख्य मिशन मोदी को सत्ता में आने से रोकना है और इसके लिउए उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र राहुल की रणनीति में सबसे आगे हैं. उत्तर प्रदेश में जहां कांग्रेस सपा-बसपा आर एल डी के साथ गठबंधन में उतरने के लिए प्रयासरत है वहीँ बिहार में आर जे डी और पश्चिम बंगाल में ममता की टी एम् सी के साथ गठबंधन की कवायद में जुटी हैं. ऐसा ही कुछ महाराष्ट्र में शरद पवार की एनसीपी के साथ गठबंधन के रूप में देखने को मिलेगा. दरअसल राहुल को लगता है कि अगर मोदी को सत्ता में काबिज़ होने से रोकना है तो ये राज्य सबसे महत्वपूर्ण साबित होंगे. ऐसे में कांग्रेस उतर प्रदेश में जहां बसपा और सपा को ज्यादा सीटें देकर खुद नाममात्र की सीटों पर ही चुनाव लड़ेगी वहीँ पश्चिम बंगाल में ममता और बिहार में आर जे डी ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ेंगी जबकि कांग्रेस के हिस्से कम ही सीटें आएँगी. हालांकि महाराष्ट्र की परिस्थितियां थोड़ी अलग हैं. यहाँ कांग्रेस की एनसीपी के साथ बराबर की सीटों पर लड़ने की बात बन सकती है. या फिर यहाँ कांग्रेस लोकसभा में ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने और विधानसभा चुनाव में एनसीपी को ज्यादा सीटों पर लड़ने के लिए राज़ी कर सकती है. शरद पवार को भी इसमें कोई परेशानी नहीं होगी क्योंकि उनका सारा ध्यान महाराष्ट्र की राजनीती पर ही है. अब सबसे जरुरी बात जो प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी को लेकर है कि आखिर किसके नेत्रित्व के नीचे कांग्रेस और बाकी दूसरे दल मोदी के खिलाफ उतरेंगे. सूत्रों की मानें तो इसके लिए कांग्रेस ने एक फार्मूला तैयार किया है. जिसमे हर एक राज्य में चेहरा अलग होगा. जहां कांग्रेस की स्थिति मज़बूत है वहां राहुल गांधी ही मुख्य चेहरा होंगे वहीँ उत्तर प्रदेश में मायावती, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी, बिहार में तेजस्वी यादव मोदी के खिलाफ लड़ाई में मुख्य चेहरा होंगे. वहीँ अगर चुनावों में एनडीए 230 -240 सीटों में सिमट जाता है तो फिर कांग्रेस पहले राहुल गांधी के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश करेगी. अगर बात नहीं बनती है तो फिर कांग्रेस मायावती या फिर ममता बनर्जी के ऊपर भी अपना दांव खेल सकती है. यानी मतलब साफ़ है मोदी को रोको और उसके लिए फिर चाहे किसी भी हद तक जाना पड़े.   Read More
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