• समय पूर्व दिसम्बर में ही हो सकते लोकसभा चुनाव, प्रधानमन्त्री मोदी के साथ अमित शाह के इलेक्शन मोड में आने से मिला अफवाहों को बल..........!

    आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): प्रधानमंत्री आज उत्तर प्रदेश में गरज़े, निशाने पर सीधे कांग्रेस थी और काग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी भी. वहीँ अमित शाह ने मध्य प्रदेश में जमकर कांग्रेस को घेरा. यानी मतलब साफ़ है की बीजेपी इलेक्शन मोड़ में आ चुकी है. हालांकि बीजेपी इसे साल के अंत में होने वाले कुछ राज्यों के विधानसभा चुनावों की तैयारी बता रही है लेकिन जानकारों की मानें तो इन्हीं राज्यों के विधानसभा चुनाव के साथ-साथ बीजेपी लोकसभा चुनाव भी करवा सकती है. इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह बीजेपी के प्रति दिनोंदिन बढ़ता असंतोष बताया जा रहा है. साथ ही विपक्ष के बीच जिस तरह से एकता की कवायद शुरू हो चुकी है ऐसे में अगर बीजेपी के खिलाफ एक महागठबंधन बन गया तो बीजेपी के लिए मुसीबत पैदा हो सकती है.  जानकारों की मानें तो जिस तरह से उत्तर प्रदेश में बसपा-सपा के गठबंधन ने बीजेपी को हर मोर्चे पर शिकस्त दी उसने बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की नींद उड़ा रखी है. बीजेपी की तमाम कोशिशों के बावजूद सपा-बसपा ने बीजेपी के हाथों से फूलपुर और गोरखपुर छीने तो बाद में नूरपुर और कैराना में बीजेपी को करारी मात देकर ये साबित किया की मोदी को हराना नामुमकिन नहीं है इसके लिए बस विपक्ष को अपने मतभेद भुलाकर एक साथ आना होगा. शायद इसी का नतीजा है कि अब देशभर में बीजेपी के खिलाफ सारा विपक्ष एक साथ मोदी के खिलाफ चुनाव में आने की मुहीम पर मेहनत कर रहा है जिसके नतीजे भी सामने आरहे हैं. कर्नाटक में जेडीएस और कांग्रेस ने मिलकर बीजेपी के सरकार बनाने के मंसूबों पर पानी फेर दिया. अब यही विपक्षी एकता की क़वायद महाराष्ट्र में भी शुरू हो चुकी है जहाँ बीजेपी का पुराना साथी शिवसेना उनके साथ नहीं है. यहाँ एनसीपी-कांग्रेस एक मज़बूत गठबंधन की कवायद में जुटे हैं क्योंकि उन्हें मालूम है की अगर बीजेपी और शिवसेना अलग-अलग लादे तो कांग्रेस-एनसीपी उन्हें मात दे सकते हैं. वहीँ बंगाल में भी कांग्रेस बीजेपी के खिलाफ ममता के साथ गठबंधन के लिए उत्सुक है. अगर ममता से बात नहीं बनती है वाम मोर्चा इ और विकल्प हो सकता है. इसके अलवा बिहार, झारखण्ड, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, सब राज्यों में बीजेपी के खिलाफ़ विपक्ष एकजुट हो रहा है जो जाहिर तौर पर बीजेपी के लिए चिंता का सबब है. ऐसे में जानकारों की मानें तो बीजेपी इस तरह से विपक्ष को एकजुट होने का समय नहीं देना चाहती. इससे पहले कि विपक्ष एकजुट हो बीजेपी साल के अंत में होने वाले कुछ राज्यों के विधानसभा चुनाव के साथ-साथ लोकसभा चुनाव भी करवा सकती है.  हालांकि बीजेपी इसे महज़ अफवाह ही बता रही है. बीजेपी के मुताबिक लोकसभा चुनाव अपने तय वक़्त पर ही होंगे. पार्टी की मानें तो अभी पार्टी का सारा ध्यान आने वाले कुछ राज्यों के विधानसभा चुनावों पर केन्द्रित है जिसके लिए बीजेपी तरह-तरह से लोगों तक अपनी पहुँच बनाने की कोशिशों में जुटी हुई है. अब होता क्या है ये तो वक़्त ही बतायेगा लेकिन इतना तय है कि बीजेपी के चाणक्य अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले कुछ समय से जिस तरह से इलेक्शन मोड़ में आये हैं उससे इस तरह की अफवाहों को और बल मिला है. Read More
  • हरियाणा: मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है बाढ़डा, सरकार और स्थानीय एम्एलए अपने एसी कमरों में मस्त, जनता त्रस्त: देवेन्द्र आर्यनगर

    आवाज़(मुकेश शर्मा, गुरुग्राम): बाढ़डा हल्का आज अपने बुरे दिनों के लिए रो रहा है. सरकार और  स्थानीय एमएलए अपने एसी कमरों में मस्त हैं और जनता त्रस्त है. समझ नहीं आ रहा कि किसके पास जाएँ, किसे अपने दुखड़े सुनाएं. कुछ ऐसा कहना है कांग्रेस नेता देवेन्द्र आर्यनगर का. आर्यनगर ने बीजेपी की सरकार पर बाढ़डा की अनदेखी करने का आरोप लगाया. देवेन्द्र की मानें तो बीजेपी राज के पिछले 4   साल में बाढ़डा आगे जाने के बजाए पीछे चला गया है. देवेन्द्र ने आरोप लगाया की आज बाढ़डा में कैंसर रोग बुरी तरह से पांव पसार रहा है, लेकिन सरकार के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही. आलम ये है कि बाढ़डा के लगभग 119 गांवों में कैंसर एक भयानक बीमारी के रूप में उभर रहा है. लेकिन सरकार तमाश्गीन बनी हुई है. जब भी चुनाव आते हैं तो जनता बड़ी उम्मीद से वोट देती है कि जनप्रतिनिधि उनकी बिजली, पानी और सडक जैसी मूलभूत समस्याओं को सुलझाएगा लेकिन अंत में उनके हाथ निराशा ही लगती है. आर्यनगर ने कैंसर की मुख्य वजह यहाँ के पानी को बताया.उन्होंने कहा कि बाढ़डा हलके में वैसे ही पानी की समस्या पिछले कई वर्षों से चली आ रही है जिसके कारण बाढ़डा डार्क जोन में आता है. ज्यादातर गांवों में भूमि जल स्तर पूरी तरह गिर चुका है और जहाँ पानी है भी उसमे क्लोराइड की मात्रा इतनी ज्यादा है की लोग उस पानी को पीकर कैंसर जैसी बिमारी का शिकार हो रहे हैं. सरकार तमाशगीन बनी हुई है और लोग परेशान हैं. देवेन्द्र ने कहा कि अबकी बार चुनावों में जनता उन सब नेताओं को सबक सिखाएगी जो यहां के नेता याद रखेंगे. वहीँ देवेन्द्र ने आज तक इस समस्या का समाधान न होने की सबसे बड़ी वजह बताई कि जो भी नेता यहाँ से जीता वो बाढ़डा से बाहर जाकर बस गया. फिर उसे यहाँ के लोगों के सुख-दुःख से कोई वास्ता नहीं रहा. वहीँ कांग्रेस ने भी जिसको टिकेट दिया वो उम्मीदवार बाढ़डा का न होकर बाहरी था. देवेन्द्र ने कहा कि अब वक़्त आ गया है जब बाढ़डा की जनता ने मन बना लिया है कि जो नेता बाढ़डा के लोगों को इन समस्याओं से निजात दिलाएगा वो उसी का साथ देगी. वहीँ आर्यनगर ने उम्मीद जताई कि कांग्रेस भी यहाँ के लोगों की मनोभावनाओं को समझते हुए यहाँ के ही किसी वाशिंदे को टिकेट देगी और जनता उसे भारी मतों से जिताकर भेजेगी. आर्यनगर ने उम्मीद जताई कि जनता अगले चुनाव में बीजेपी को खारिज़ कर कांग्रेस के साथ चलेगी और कांग्रेस राज में ही बाढ़डा के लोगों को इन समस्याओं से निजात मिलेगी.   Read More
  • उत्तर प्रदेश : माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी का बागपत जेल में मर्डर, गैंगस्टर ने मारी 10 गोलियां, अभी कुछ दिन पहले ही पत्नी ने जताया था हत्या का शक........

    आवाज़(रेखा राव, दिल्ली): आखिर वही हुआ जिसका शक अभी कुछ दिन पहले कुख्यात डॉन मुन्ना बजरंगी की पत्नी ने जताया था. यूपी के कुख्यात माफिया डॉन प्रेम प्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी को बागपत जेल में गोलियों से भून कर उसकी हत्या कर दी गई. यहाँ मुन्ना बजरंगी की पूर्व बसपा विधायक लोकेश दीक्षित से रंगदारी मांगने के आरोप में बागपत कोर्ट में मुन्ना बजरंगी की पेशी होनी थी. जिसके लिए उसे रविवार झांसी से बागपत लाया गया था. इसी दौरान जेल में उसकी हत्या कर दी गई. पुलिस इस मामले की जांच में जुटी है. शुरुआती जानकारी के मुताबिक मुन्ना बजरंगी को 10 गोलियां मारी गईं. योगी सरकार ने इस मामले में तुरंत कार्रवाई करते हुए एडीजी जेल ने बागपत जेल के जेलर, डिप्टी जेलर, जेल वॉर्डन और दो सुरक्षाकर्मियों को सस्पेंड कर दिया है. साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद संज्ञान लेते हुए मामले की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं. मुन्ना के साले विकास श्रीवास्तव ने बताया कि उसे 10 गोली मारी गई है. उन्होंने सुनील राठी पर आरोप लगाए हैं. अबतक प्राप्त जानकारी के मुताबिक, जेल में बंद कुख्यात बदमाश सुनील राठी के शूटर्स ने मुन्ना बजरंगी को गोली मारी है.  मुन्ना पर बड़ौत के पूर्व बसपा विधायक लोकेश दीक्षित और उनके भाई नारायण दीक्षित से 22 सितंबर 2017 को फोन पर रंगदारी मांगने और धमकी देने का आरोप था. मुन्ना बजरंगी के नाम से मशहूर इस कुख्यात डॉन का असली नाम प्रेम प्रकाश सिंह है. उसका जन्म 1967 में उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के पूरेदयाल गांव में हुआ था. उसके पिता पारसनाथ सिंह उसे पढ़ा लिखाकर बड़ा आदमी बनाने का सपना संजोए थे. मुन्ना बजरंगी ने उनके अरमानों को कुचल दिया. उसने पांचवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ दी. इसके बाद जुर्म की दुनिया में कदम रख दिया. शुरुआत में उसे जौनपुर के दबंग गजराज सिंह का संरक्षण हासिल हुआ जिसके चलते इसने 1984 में लूट के लिए एक व्यापारी की हत्या कर दी. इसके बाद उसने गजराज के इशारे पर ही जौनपुर के भाजपा नेता रामचंद्र सिंह की हत्या करके पूर्वांचल में अपना काला कारोबार जमाया. वहीँ 90 के दशक में पूर्वांचल के बाहुबली मुख्तार अंसारी का हाथ थामा और उसकी गंग में शामिल हो गया.  इसी बीच मुख्तार अंसारी ने अपराध की दुनिया से राजनीति में कदम रखा और वो साल 1996 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर मऊ से विधायक निर्वाचित हुआ. अंसारी के विधायक बनने के बाद तो मुन्ना बजरंगी की ताकत कई गुना बढ़ गई. मुन्ना सीधे पर सरकारी ठेकों को प्रभावित करने लगा था. मुख्तार का खास आदमी बन गया. फिर चाहे वो पूर्वांचल में सरकारी ठेकों और वसूली के कारोबार पर मुख्तार अंसारी का कब्जा था. लेकिन इसी दौरान तेजी से उभरते बीजेपी के विधायक कृष्णानंद राय उनके लिए चुनौती बनने लगे. उन पर मुख्तार के दुश्मन ब्रिजेश सिंह का हाथ था. उसी के संरक्षण में कृष्णानंद राय का गैंग फल फूल रहा था. इसी वजह से दोनों गैंग अपनी ताकत बढ़ा रहे थे. इनके संबंध अंडरवर्ल्ड के साथ भी जुड़े गए थे. कृष्णानंद राय का बढ़ता प्रभाव मुख्तार को रास नहीं आ रहा था. उन्होंने कृष्णानंद को खत्म करने की जिम्मेदारी मुन्ना को सौंप दी. मुख्तार से फरमान मिल जाने के बाद मुन्ना बजरंगी ने भाजपा विधायक कृष्णानंद राय को खत्म करने की साजिश रची. 29 नवंबर 2005 को कृष्णानंद की हत्या कर दी. उत्तर प्रदेश समते कई राज्यों में मुन्ना के खिलाफ मुकदमे दर्ज थे. वह पुलिस के लिए परेशानी का सबब बन चुका था. उसके खिलाफ सबसे ज्यादा मामले यूपी में दर्ज हैं. 29 अक्टूबर 2009 को दिल्ली पुलिस ने मुन्ना को मुंबई के मलाड इलाके में नाटकीय ढंग से गिरफ्तार कर लिया था. ऐसा माना जाता है कि एनकाउंटर के डर से उसने खुद गिरफ्तारी करवाई थी.(इनपुट:आजतक डॉट इन) Read More
  • सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी नहीं थमी दिल्ली की जंग, सिसोदिया के पास लौटी ट्रांसफर की फाइल, कोर्ट जा सकती है सरकार.....

    आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): सुप्रीम कोर्ट ने के ऐतिहासिक फैसले के बाद भी देश की राजधानी दिल्ली में चल रही उपराज्यपाल और सरकार के बीच की लड़ाई ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रही है. बुधवार शाम को सर्विसेज़ विभाग ने उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की फाइल को लौटा दिया. जिससे ये साफ़ हो गया कि आने वाले दिनों में भी ये लड़ाई इसी तरह जारी रहेगी. वहीँ उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की फाइल लौटाने पर कहा है कि सर्वोच्च न्यायालय का फैसला सर्वोपरि है. फैसलों से अधिकारों की लकीर खींच दी गई है. बताया जा रहा है कि अगर आदेश नहीं माना गया तो दिल्ली सरकार कोर्ट का रुख कर सकती है. इस मुद्दे पर मनीष सिसोदिया आज प्रेस कॉन्फ्रेंस भी करेंगे. आखिर क्या है ये पूरा माजरा......? दरअसल, बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के कुछ ही देर बाद ही सर्विसेज विभाग ने डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया की भेजी गई फाइल को लौटा दिया. इसकी शुरुआत देर रात उस वक्त हुई जब दिल्ली के नौकरशाह के एक वरिष्ठ अफसर ने उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के आदेश पर टका सा जवाब देते हुए उसे मानने से साफ इनकार कर दिया. दिल्ली के सर्विसेज डिपार्टमेंट यानी अफसरों के ट्रांसफर पोस्टिंग और सेवा से जुड़े मामलों को देखने वाले विभाग के सचिव ने मनीष सिसोदिया का आदेश वापस लौटा दिया. गौरतलब है कि सिसोदिया के आदेश को न मानने के पीछे दो तर्क दिए गए हैं. एक तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहीं भी अगस्त 2016 के नोटिफिकेशन को रद्द नहीं किया गया है और दूसरा ये कि इस नोटिफिकेशन में अफसरों के ट्रांसफर और पोस्टिंग का अधिकार उपराज्यपाल या मुख्य सचिव के पास है. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा था......? दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार और उपराज्यपाल के बीच काफी लंबे समय से चल रही जंग के बीच आज सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि उपराज्यपाल दिल्ली में फैसला लेने के लिए स्वतंत्र नहीं हैं, एलजी को कैबिनेट की सलाह के अनुसार ही काम करना होगा. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलना मुमकिन नहीं है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले से साफ है कि दिल्ली की चुनी हुई सरकार ही राज्य को चलाने के लिए जिम्मेदार है. फैसले के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी ट्वीट कर खुशी जता दी है, उन्होंने कहा है कि दिल्ली में लोकतंत्र की जीत हुई है. आम आदमी पार्टी लगातार आरोप लगाती रही है कि केंद्र की मोदी सरकार एलजी के जरिए अपना एजेंडा आगे बढ़ा रही है और राज्य सरकार को काम नहीं करने दे रही है.   Read More
  • एलजी नहीं चुनी गई सरकार ही है दिल्ली की असली बॉस, हर मामले में एलजी की अनुमति जरुरी नहीं: सुप्रीम कोर्ट

    आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार और उपराज्यपाल के बीच काफी लंबे समय से चल रही जंग के बीच आज सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि उपराज्यपाल दिल्ली में फैसला लेने के लिए स्वतंत्र नहीं हैं, एलजी को कैबिनेट की सलाह के अनुसार ही काम करना होगा. इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिलना मुमकिन नहीं है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले से साफ है कि दिल्ली की चुनी हुई सरकार ही राज्य को चलाने के लिए जिम्मेदार है. फैसले के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी ट्वीट कर खुशी जता दी है, उन्होंने कहा है कि दिल्ली में लोकतंत्र की जीत हुई है. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने टिप्पणी करते हुए कहा कि उपराज्यपाल को दिल्ली सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहिए. पुलिस, जमीन और पब्लिक ऑर्डर के अलावा दिल्ली विधानसभा कोई भी कानून बना सकती है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा है कि दिल्ली में किसी तरह की अराजकता की कोई जगह नहीं है, सरकार और एलजी को साथ में काम करना चाहिए. दिल्ली की स्थिति बाकी केंद्र शासित राज्यों और पूर्ण राज्यों से अलग है, इसलिए सभी साथ काम करें. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने टिप्पणी करते हुए कहा कि संविधान का पालन सभी की ड्यूटी है, संविधान के मुताबिक ही प्रशासनिक फैसले लेना सामूहिक ड्यूटी है. SC ने कहा कि केंद्र और राज्य के बीच भी सौहार्दपूर्ण रिश्ते होने चाहिए. राज्यों को राज्य और समवर्ती सूची के तहत संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करने का हक है. मंत्रिमंडल के फैसले नहीं लटका सकते हैं LG फैसला सुनाते हुए जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि राष्ट्र तब फेल हो जाता है, जब देश की लोकतांत्रिक संस्थाएं बंद हो जाती हैं. हमारी सोसाइटी में अलग विचारों के साथ चलना जरूरी है. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा है कि मतभेदों के बीच भी राजनेताओं और अधिकारियों को मिलजुल कर काम करना चाहिए. उन्होंने कहा कि असली शक्ति और जिम्मेदारी चुनी हुई सरकार की ही बनती है. उपराज्यपाल मंत्रिमंडल के फैसलों को लटका कर नहीं रख सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा है कि एलजी का काम राष्ट्रहित का ध्यान रखना है, उन्हें इस बात को ध्यान में रखना चाहिए कि चुनी हुई सरकार के पास लोगों की सहमति है. हर फैसले के लिए एलजी की मंजूरी की जरूरी नहीं SC की ओर से कहा गया है कि उपराज्यपाल को सिर्फ कैबिनेट की सलाह पर ही फैसला करना चाहिए अन्यथा मामला राष्ट्रपति के पास भेज देना चाहिए. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा है कि एलजी का काम दिल्ली सरकार के हर फैसले पर रोकटोक करना नहीं है, ना ही मंत्रिपरिषद के हर फैसले को एलजी की मंजूरी की जरूरत नहीं है. गौरतलब है कि कभी एसीबी पर अधिकार को लेकर झगड़ा तो कभी मोहल्ला क्लीनिक और राशन डिलीवरी स्कीम का विवाद. जब से अरविंद केजरीवाल दिल्ली की सत्ता में आए हैं, ये आरोप सुनने को मिलता रहता था कि उपराज्यपाल उन्हें काम करने नहीं दे रहे हैं. पांच जजों की संविधान पीठ में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के साथ जस्टिस एके सीकरी, जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस अशोक भूषण शामिल हैं. सुप्रीम कोर्ट ने बदला हाईकोर्ट का फैसला इससे पहले यह मामला दिल्ली हाई कोर्ट में था, जहां से आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल को झटका लगा था. दिल्ली सरकार बनाम उपराज्यपाल के बीच अधिकारों की लड़ाई पर फैसला सुनाते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने 4 अगस्त, 2016 को कहा था कि उपराज्यपाल ही दिल्ली के प्रशासनिक प्रमुख हैं और दिल्ली सरकार एलजी की मर्जी के बिना कानून नहीं बना सकती. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के इस फैसले को पूरी तरह से पलट दिया है. हाई कोर्ट ने साफ कर दिया था एलजी दिल्ली सरकार के फैसले को मानने के लिए किसी भी तरह से बाध्य नहीं हैं. वह अपने विवेक के आधार पर फैसला ले सकते हैं. जबकि दिल्ली सरकार को कोई भी नोटिफिकेशन जारी करने से पहले एलजी की सहमति लेनी ही होगी. यही वजह है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल हमेशा एलजी पर फाइलें अटकाने का आरोप लगाते रहते हैं. हाल ही में वो अपने तीन मंत्रियों के साथ एक हफ्ते से ज्यादा तक एलजी ऑफिस में धरने पर बैठे रहे थे. अरविंद केजरीवाल की तरफ से कोर्ट में कई तर्क दिए गए हैं, जिसमें उन्होंने बताया है कि उपराज्यपाल उनके काम में रोड़ा बन रहे हैं. क्या थे केजरीवाल सरकार के वो 10 तर्क: 1. चपरासी से लेकर अधिकारियों की नियुक्ति ट्रांसफर-पोस्टिंग और उनके खिलाफ कार्यवाही करने का अधिकार नहीं रह गया इसलिए सरकारी मुलाजिम चुनी हुई सरकार के आदेश नहीं मानते. 2. सेवा विभाग उप राज्यपाल के अधीन किए जाने की वजह से गेस्ट टीचर्स को परमानेंट करने और नए शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो पाई. 3. सेवा विभाग सरकार के अधीन ना होने से कई नए बनाए गए मोहल्ला क्लीनिक के संचालन के लिए डॉक्टर पैरामेडिकल और नर्सिंग स्टाफ की नियुक्ति नहीं हो पाई. 4. एंटी करप्शन ब्रांच को उपराज्यपाल के अधीन किए जाने के बाद से सरकार भ्रष्ट कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं कर पा रही जिससे सरकार में भ्रष्टाचार बढ़ा. सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम को धक्का लगा. 5. नीतिगत फैसलों पर अमल करने का आखरी अधिकार उपराज्यपाल के अधीन होने के चलते चुनी हुई सरकार कई योजनाएं लागू नहीं कर पाई. 6. CCTV योजना, नए मोहल्ला क्लीनिक बनाए जाने की योजना, सेवाओं की होम डिलीवरी की योजना, राशन की होम डिलीवरी की योजना जैसी कई स्कीम लंबे वक्त के लिए बाधित रहीं. 7. हर फाइल को मंजूरी के लिए उपराज्यपाल को भेजना जरूरी और उपराज्यपाल फाइलों पर लंबे समय तक बैठे रहे. 8. सरकार द्वारा नियुक्त किए गए सलाहकारों और विशेषज्ञों की नियुक्ति को उपराज्यपाल ने खारिज किया जिससे सरकार के काम पर प्रभाव पड़ा. 9. कैबिनेट की सलाह उपराज्यपाल पर बाध्य ना होने से उन्होंने सरकार के नीतिगत फैसले को पलट दिया या खारिज कर दिया. 10. केंद्र सरकार द्वारा शक्ति विहीन और उस पर हाईकोर्ट के आदेशों के बाद चुनी हुई सरकार का दिल्ली में सरकार चलाना मुश्किल हो गया. चुनी हुई सरकार महज़ सलाहकार की भूमिका में रह गई.(सौजन्य:आजतक डॉट इन) Read More
  • हरियाणा: आगामी चुनावों में हारेंगे बीजेपी के 90 फीसदी एमपी और एम्एलए : सांसद राज कुमार सैनी

    आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): बीजेपी के कुरुक्षेत्र से सांसद राज कुमार सैनी हमेशा अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं. उनकी बीजेपी से नाराजगी भी जगजाहिर है और वो पहले ही ये घोषणा कर चुके हैं कि वो अगला चुनाव बीजेपी से नहीं लड़ेंगे. इसके लिए उन्होंने अपनी अलग पार्टी बनाने की भी घोषणा की थी और उनके मुताबिक जल्द ही वो पार्टी के नाम की भी घोषणा कर देंगे जिसकी सभी औपचारिकताएं पूरी कर दी गई हैं. लेकिन यहाँ मुद्दा ये नहीं है कि वो अगला चुनाव किस पार्टी से लड़ने जा रहे हैं. यहाँ हम टी उनके उस ब्यान की कर रहे हैं जिसके कारण वो एक बार फिर से सुर्ख़ियों में आ गये हैं.  राजकुमार सैनी की मानें तो हरियाणा के आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों में बीजेपी के 90 फीसदी एमपी और एम्एलए अपना चुनाव हारेंगे. एक निजी टीवी चैनल द्वारा पूछे गये सवालों के जवाब देते हुए सैनी ने कहा कि वो नाम लेकर ये तो नहीं कहेंगे कि कौन-कौन हारने वाला है लेकिन मुख्यमंत्री भी एम्एलए ही होता है.ऐसे में आप अंदाज़ा लगा सकते हैं. सैनी ने इसके पीछे वजह बताई कि बीजेपी ने उन सब लोगों के खिलाफ काम किया जिन्होंने उसे वोट दिया था. वहीँ बीजेपी से उनकी नाराज़गी के बारे में उनसे जब सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि मेरी नाराज़गी बीजेपी से उनकी अकेले की नाराज़गी नहीं है. जात आन्दोलन के दौरान उनसे जो व्यवहार किया गया उसे लेकर वो बीजेपी से नाराज़ हैं, और मैं ही नहीं बल्कि बीजेपी ने हरियाणा में उन सब के खिलाफ काम किया जिन्होंने उन्हें वोट दिया था. इसलिए लोग बीजेपी से नाराज़ हैं. जिसका परिणाम बीजेपी को भुगतना होगा. वहीँ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में जब उनसे पूछा गया तो तो उन्होंने कहा कि उनकी प्रधानमंत्री मोदी से कोई नारजगी नहीं है. लेकिन उनके की जो फौज है उनके बारे मे प्रधानमंत्री को पता नहीं है. वो देश की समस्यायों से अवगत हैं.  जब सैनी से बीजेपी से रिश्तों के बारे में पूछा गया तो सैनी ने कहा कि पिछले 3 साल से वो पार्टी के सम्पर्क में नहीं हैं. उनकी पार्टी के किसी भी पदाधिकारी से कोई बातचीत नहीं हुई है. लेकिन पार्टी की तरफ से मुझे अबतक  कोई भी नोटिस नहीं भेजा गया है. शायद उन्हें लगता हो कि सैनी ड्रामा कर रहा हो, लेकिन में अब भी अपने बयानों पर कायम हूँ और रहूँगा. वहीँ आरक्षण पर के सवाल पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि वो किसी के आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं बल्कि वो चाहते हैं कि जाती के अनुपात के आधार पर 100 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था हो, और उन्हें अगर भविष्य में मौका मिला तो वो इसे हरियाणा में लागू करके भी दिखा देंगे.(इनपुट:जनसत्ता डॉट कॉम) Read More
  • गुजरात: कांग्रेस को ज़ोर का झटका धीरे से, कांग्रेस MLA कुंवरजी बावलिया बीजेपी में शामिल, आज बनेंगे मंत्री.....!

    आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): बीजेपी का मिशन 2019 पूरे जोर शोर से शुरू है. देश भर में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह खुद कमान सम्भाले हुए हैं और सम्पर्क फॉर समर्थन कार्यक्रम के तहत सम्मानित लोगों से मिलकर समर्थन जुटाने का अलावा पार्टी कार्यकर्ताओं में भी जान फूंकने में लगे हुए हैं. ऐसे में गुजरात से भी बीजेपी के लिए एक अच्छी खबर आई है. बीजेपी ने यहाँ गुजरात में कांग्रेस को बड़ा झटका देते हुए कोली समाज के बड़े नेता कुंवरजी बावलिया को अपने खेमे में लाने में सफलता हासिल की है. बावलिया ने कांग्रेस से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक बीजेपी के लिए ये एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है और बीजेपी भी बावलिया को पूरा सम्मान देते हुए मंगलवार शाम 4 बजे मंत्री पद से नवाजने जा रही है. कुंवरजी बावलिया ने मंगलवार को बतौर विधायक गुजरात विधानसभा के स्पीकर राजेन्द्र त्रिवेदी को मिलकर अपना इस्तीफा सौंपा है. सूत्रों की मानें तो बावलिया विधानसभा चुनाव 2017 में कांग्रेस द्वारा की गई अनदेखी से नाराज थे और इस संबंध में कांग्रेस आलाकमान के सामने अपनी बात भी रखी थी.  लेकिन उनकी बात को न तो कंग्रेस ने तरजीह दी और न ही कोई सुनवाई हुई, अंत में बावलिया ने आज अपने समर्थकों के साथ बीजेपी के दफ्तर पहुंचकर गुजरात बीजेपी के अध्यक्ष की मौजूदगी में बीजेपी ज्वाइन कर ली. सूत्रों की मानें तो बावलिया आज दोपहर 4 बजे तक मंत्री पद की भी शपथ लेंगे. गौरतलब है कि कुंवरजी बावलिया राजकोट जिले की जसदन विधानसभा सीट से विधायक हैं. कुंवरजी बावलिया की उम्र 62 साल है. इन्होंने ग्रेजुएट किया हुआ है. पिछले विधानसभा चुनाव में इन्होंने 39 साल के बीजेपी उम्मीदवार भरत बोघा को हराकर जीत हासिल की थी. बावलिया साल 2009 और साल 2014 में राजकोट सीट से कांग्रेस के सांसद भी रह चुके हैं. कांग्रेस के लिए इसे 2019 लोकसभा के चुनाव से पहले बड़ा झटका माना जा रहा है. दरअसल, कुंवर जी खुद कोली समाज का बडा नाम हैं और लोकसभा की 3 सीट पर उनका प्रभुत्व माना जा रहा है. उनके कांग्रेस छोडने से सौराष्ट्र में कोली समाज की वोटबैंक पर बड़ा असर होगा.         Read More
  • गिरफ्तारी से बचने के लिए शशि थरूर ने दायर की अग्रिम जमानत याचिका, बोले:दिल्ली पुलिस मुझे जबरन फंसा रही है.........

    आवाज़(मुकेश शर्मा, दिल्ली): कांग्रेस नेता शशि थरूर के सितारे आजकल कुछ ख़राब चल रहे हैं. सुनंदा पुष्कर मौत मामले में दिल्ली पुलिस ने के चार्ज शीट दाखिल करने के बाद उनपर गिरफ्तारी का खतरा मंडराने लगा है, जिसे देखते हुए थरूर ने इस मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की है. इसी अर्जी पर सुनवाई करते हुए पटियाला हाउस कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को नोटिस देकर उनका जवाब मांगा है. पटियाला हाउस कोर्ट कल इस मामले में दोबारा सुनवाई करेगी. कोर्ट में जमानत अर्जी लगाने के पीछे शशि थरूर का मकसद साफ दिख रहा है. लगता है कि दिल्ली पुलिस इस मामले में चार्जशीट दाखिल होने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर सकती है. कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान शशि थरूर के वकील की तरफ से बताया गया कि इस मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा उन्हें जबरन फंसाया जा रहा है, और इसी दर के चलते थरूर ने कोर्ट का रुख किया है. अब देखना ये है कि कल होने वाली सुनवाई में कोर्ट शशि थरूर को राहत देती है या नहीं. गौरतलब है कि पिछले महीने जून में सुनंदा पुष्कर मौत मामले में सुनवाई के दौरान कोर्ट शशि थरूर को पेश होने के लिए समन कर चुका है. शशि थरूर को इस मामले में 7 जुलाई में कोर्ट के सामने पेश होना है. हालांकि इस मामले में दिल्ली पुलिस पहले ही चार्जशीट दाखिल कर चुकी है जिसमें सुनंदा पुष्कर मौत मामले में शशि थरूर को आरोपी बनाया गया है. दिल्ली पुलिस ने शशि थरूर पर सुनंदा पुष्कर को आत्महत्या करने के लिए उकसाने और शादीशुदा जिंदगी में सुनंदा को प्रताड़ित करने का आरोप लगया है. Read More
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Business

जेपी इन्फ्राटेक के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, अगली सुनवाई 10 अक्टूबर को

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05 September 2017

आवाज़ ब्यूरो(दिल्ली): सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को जेपी इन्फ्राटेक को...

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गांगुली बोले- कुंबले-कोहली लड़ें या नहीं, PAK को तो हराएंगे ही

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31 May 2017

चैंपियंस ट्रॉफी से ठीक पहले आजतक के मंच पर जुट रहे हैं क्रिकेट की...

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01 June 2017

कुदरत के बारे में जितनी सुंदर कल्पना कर सकते हैं उससे कहीं ज्यादा खूबसूरत...

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29 May 2017

 लगातार अंतरिक्ष में अपनी मजबूत स्थिति दर्ज कराने में जुटा इसरो...

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